इलाहाबाद (ब्यूरो)। अपने लापता बेटे की तलाश में एक गरीब और अशिक्षित मां की फरियाद रंग लाई। हाईकोर्ट ने न्याय की गुहार लगाने वाली इस मां के पक्ष में मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। मामला बदायूं जिले का है। हाईकोर्ट ने सीबीआई को निर्देश दिया है कि वह घटना से संबंधित सभी रिकार्ड अपने कब्जे में लेकर एक माह में प्रगति रिपोर्ट दाखिल करे। पीड़ित मां सत्यवती की याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति शशिकांत गुप्ता और न्यायमूर्ति विजय लक्ष्मी ने यह आदेश दिया है। खंडपीठ ने घटना की जांच सीबीआई को सौंपते हुए निदेशक सीबीआई, नई दिल्ली को जांच अपने हाथ में लेने का निर्देश दिया है।
याची का आरोप है कि वर्ष 2014 में उसके बेटे का अपहरण कर लिया गया था। इसकी प्राथमिकी थाना इस्लामनगर में मनफूल सिंह और अन्य लोगों के खिलाफ दर्ज कराई गई है। चूंकि मनफूल सिंह प्रभावशाली व्यक्ति है और उसके परिवार के कई सदस्य पुलिस में उच्च अधिकारी हैं, इसलिए पुलिस ने अब तक अपह्त लड़के की तलाश नहीं की। घटना की विवेचना भी नहीं की जा रही है। यहां तक कि कुर्की और फरारी के आदेश को भी अमल में नहीं लाया गया। याची के वकील मोहित सिंह द्वारा दाखिल हलफनामे में बताया गया कि आरोपी का पुत्र अजय यादव पुलिस इंस्पेक्टर है और गाजियाबाद में तैनात है। मनफूल का बहनोई चरन सिंह का दामाद योगेश यादव नोएडा में एसपी सिटी हैं। योगेश के चचेरे भाई सौमित्र यादव एसएसपी बदायूं हैं। मनफूल सिंह के सगे भाई रनवीर सिंह रिटायर्ड डिप्टी एसपी हैं।
कोर्ट ने कहा कि इससे स्पष्ट है कि बड़ी संख्या में आरोपी के सगे संबंधी पुलिस विभाग में तैनात हैं। याची का यह भी दावा है कि उसकी गुमशुदगी रिपोर्ट भी उसकी लिखी हुई नहीं है, बल्कि इसे पुलिस ने खुद तैयार किया है। कोर्ट ने कहा कि याची एक अशिक्षित महिला है और उसे आशंका है कि यूपी पुलिस से उसे न्याय नहीं मिल सकता है। न्याय का सामान्य सिद्धांत है कि न्याय न सिर्फ किया जाना बल्कि न्याय होता दिखना भी चाहिए।