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मेजा में पट रहा तालाब, अफसरों ने मूंदी आंखें

Sat, 06 Feb 2016 01:25 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो, इलाहाबाद
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 मेजा तहसील में तालाब पाटा जा रहा है और अफसर आंखें मूंदकर बैठे हैं। पहाड़ी गांव जोरा में सिंचाई और पशुओं के पानी पीने के लिए यही एकमात्र जरिया है लेकिन इस पर अब पक्के मकान बनवाए जा रहे हैं। गांव के लोगों ने कमिश्नर, डीएम और राजस्व परिषद से मामले की शिकायत भी की है लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, एसडीएम को इस बारे में कोई जानकारी ही नहीं है। निर्माण के कारण तालाब में पानी बहुत कम बचा है। सिंचाई तो दूर, पशुओं को भी अपनी प्यास बुझाने के लिए कोसों दूर जाना पड़ रहा है।
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मेजा तहसील के खीरी थाना क्षेत्र में जोरा गांव की खतौनी में आराजी नंबर 16, 59 एवं 89 तालाब के रूप में दर्ज है लेकिन मौके पर स्थिति कुछ और है। आराजी नंबर 16 का क्षेत्रफल 0.748 हेक्टेयर, आराजी नंबर 59 का क्षेत्रफल 4.007 हेक्टेयर और आराजी नंबर 89 का क्षेत्रफल 1.107 हेक्टेयर है। सुप्रीम कोर्ट का आदेश है कि तालाब पर किसी तरह का अतिक्रमण न हो लेकिन गांव में इन तीनों आराजी नंबर के कुछ हिस्से पर पक्का निर्माण कराकर अतिक्रमण किया जा रहा है। निर्माण करा रहे लोग पहुंच वाले हैं और सरकारी महकमे में उनका खासा रुतबा है, सो अफसर भी अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं।

गांव के लोगों ने इलाहाबाद के कमिश्नर, डीएम के साथ राजस्व परिषद से भी इसकी लिखित शिकायत की है। गांव वालों का कहना है कि तालाब पर अवैध निर्माण नहीं रोका गया तो सिंचाई का जरिया पूरी तरह से खत्म हो जाएगा। साथ ही पशुओं को भी पीने के लिए बूंद भर पानी नहीं मिलेगा जबकि पहाड़ी इलाका होने के कारण गांव में पानी की जबर्दस्त किल्लत रहती है। गांव वालों ने अफसरों से मांग की है कि तालाब पर अवैध कब्जे पर तत्काल रोक लगाई जाए। उधर, एसडीएम मेजा आशीष मिश्र का कहना है कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है। अब मालूम हुआ है तो इसकी जांच कराएंगे। उन्हें इस बारे में भी जानकारी नहीं है कि कमिश्नर, डीएम और राजस्व परिषद से मामले की शिकायत  की गई है।
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