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26 बीडीसी सदस्यों की गिरफ्तारी पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Sat, 06 Feb 2016 01:16 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो इलाहाबाद
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 ब्लाक प्रमुख चुनाव से ठीक पहले तमाम बीडीसी सदस्यों के खिलाफ आपराधिक मुकदमे दर्ज कराने के मामले में हाईकोर्ट ने प्रदेश सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाले ऐसे 26 बीडीसी सदस्यों की गिरफ्तारी पर अदालत ने रोक भी लगा दी है। इन सदस्यों का आरोप है कि चुनाव में मतदान से रोकने केलिए सत्ता पक्ष से जुड़े ब्लाक प्रमुख अध्यक्षों के दबाव में उन पर आपराधिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें इटावा के पूर्व बसपा विधायक अजय यादव भी शामिल हैं। इन याचिकाओं पर न्यायमूर्ति बीके नारायण और न्यायमूर्ति एनए मुनीस की खंडपीठ ने सुनवाई की।
याचीगण के वकील जितेंद्र प्रसाद मिश्र ने बताया कि बांदा के जगजीत, राजेश कुमार और तीन बीडीसी सदस्यों पर थाना पिलानी में एक्सटार्सन का मुकदमा दर्ज किया गया था।
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एटा के थाना राजोर में बनवारी और सात अन्य बीडीसी सदस्यों पर डकैती का मुकदमा वहां की सपा ब्लाक प्रमुख प्रत्याशी उषा आर्या का विरोध करने के कारण दर्ज कराया गया है। पूर्व विधायक अजय यादव और आठ बीडीसी सदस्यों के खिलाफ एटा के साकीत थाने में हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज कराया गया है। जालौन के अवधेश का आरोप है कि उनके खिलाफ कैलिया थाने में लूट का मुकदमा दर्ज कराया गया है। यह मुकदमा सपा समर्थित ब्लाक प्रमुख उम्मीदवार डाली गुर्जर के इशारे में दर्ज कराया गया है। हरिनारायण सिंह और दो अन्य बीडीसी सदस्यों का भी आरोप है कि उनके खिलाफ कैलिया थाने में लूट का मुकदमा डाली गुर्जर के इशारे पर दर्ज कराया गया है। जलौन के नंदीगांव में सुरेंद्र और अन्य बीडीसी सदस्यों के खिलाफ एक्सटार्सन का मुकदमा दर्ज है।
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याचियों का पक्ष रख रहे वकीलों की दलील थी कि चूंकि इन बीडीसी सदस्यों ने अपने क्षेत्र में सपा समर्थित उम्मीदवारों का विरोध किया है, इसलिए उनको मतदान से रोकने के लिए फर्जी मुकदमों में फंसाया जा रहा है। सरकार का पक्ष रख रहे अपर महाधिवक्ता इमरानउल्ला ने कहा कि मुकदमे स्थानीय स्तर पर दर्ज कराए गए हैं। इसमें सरकार या सत्तारूढ़ पार्टी की कोई भूमिका नहीं है। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का समय देते हुए इन सभी मामलों गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है।
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