कोतवाली में चंद्रलोक सिनेमा के पास टप्पेबाजों ने सराफा कारोबारी की कार से नगदी और जेवर से भरा बैग उड़ा दिया। ड्राइवर पीछे की सीट पर रखा बैग गायब देख परेशान होकर इधर-उधर खोजने लगा। जब बैग नहीं मिला तो कारोबारी को खबर दी। बुधवार रात लाखों की टप्पेबाजी का मामला सुनकर भीड़ जुट गई। सूचना पाकर इंस्पेक्टर कोतवाली भी पहुंचे। पुलिस ने उन दुकानों पर लगे सीसीटीवी फुटेज को खंगाला। जहां कारोबारी खरीदने गए थे। शातिरों ने क ारोबारी की कार को पंक्चर कर दिया था। चालक टायर बदलने लगा। इसी दौरान शातिर बैग लेकर भाग निकले। पुलिस पूछताछ के बाद तहरीर लेकर टप्पेबाजों की खोजबीन कर रही है।
भदोही जिले के कोइरौना थाना क्षेत्र के कटरा बाजार के रहने वाले शिवकुमार सराफा कारोबारी हैं। उनकी सीतामढ़ी के पास सराफा की दुकान है। उनके बेटे विकास के ससुराल में शादी पड़ी है। शिवकुमार बुधवार दोपहर अपनी महिंद्रा क्वांटो कार से ड्राइवर, भतीजे रजत, शुभम और बहू गौरी के साथ इलाहाबाद खरीदारी करने आए थे। गौरी का हार टूट गया था। जिसे बनवाना था। इसके अलावा शिवकुमार को अपने कारोबार के लिए जेवर खरीदने थे। चौक में जेवर खरीदने के बाद वे कोठापारचा के लिए चले। चंद्रलोक सिनेमा के पास पता चला कि कार का पिछला पहिया पंक्चर है। इस पर शिवकुमार और उनकी बहू गौरी, रजत और शुभम कोठापारचा चले गए कपड़ा खरीदने।
जबकि ड्राइवर पहिया बदलने लगा। वह पहिया बदल रहा था। तभी शातिरों ने ड्राइवर से नजर चुराकर आगे की सीट के बगल सड़क पर सौ का नोट गिराकर ड्राइवर से आकर बताया कि तुम्हारी नोट गिरी है। ड्राइवर नोट उठाने चला गया। इसी बीच शातिर कार में पीछे की सीट पर रखा बैग लेकर फरार हो गए। नोट उठाकर ड्राइवर गाड़ी का पहिया बदलने लगा। उसे पता तक नहीं चला कि शातिर बैग निकाल ले गए हैं। एक बुजुर्ग ने ड्राइवर को जब बताया कि कार से कुछ लोग बैग लेकर भागे हैं, तब वह परेशान होकर बैग देखने दौड़ा।
बैग गायब देखकर वह इधर-उधर शातिरों को खोजने लगा, लेकिन कोई नजर नहीं आया। तब शिवकुमार को घटना की जानकारी दी। सूचना पाकर कोतवाली इंस्पेक्टर कुशलपाल यादव, बादशाही मंडी चौकी प्रभारी अरविंद सिंह मौके पर पहुंचे। पुलिस ने पूछताछ के बाद दुकान में लगे सीसीटीवी फुटेज को भी देखा। फुटेज के आधार पर पुलिस बदमाशों की तलाश में लगी है। खबर पाकर शिवकुमार के समधी शंभूनाथ जसरा से आ गए। शंभूनाथ ने बताया कि बैग में लगभग साढ़े आठ लाख का जेवर और 30 हजार रुपये नगदी थी।
माघ मेले के दौरान चोर उचक्के और जेबकतरों का गिरोह सक्रिय हो जाता है। जो बाहर से आने वाले मुसाफिरों को अपना शिकार बनाते हैं। टप्पेबाजों का गिरोह दो तीन वारदात को अंजाम देने के बाद शहर छोड़ देते हैं। जिसके चलते पुलिस इन्हें पकड़ नहीं पाती है। अक्सर इस गिरोह के लोग गोंडा और बिहार से आते हैं। माघ मेले के दौरान इस तरह की घटनाएं शहर में बढ़ जाती हैं।