जहर की चार गोलियां निगल गईं दो जिंदगियां
0 जमाने में कहीं आसरा नहीं मिला तो मौत को लगाया गले
जगतपुर।
उतरांव के आजाद और प्रीती के प्यार में उनका अलग-अलग समुदाय का होना ही उनका सबसे बड़ा दुश्मन बन गया। दोनों ने पूरी कोशिश की, लेकिन उन्हें कहीं आसरा नहीं मिला। रविवार रात को दोनों ने जहर खाया और एक दूसरे का हाथ पकड़कर इस दुनिया से विदा हो गए। जहर की चार गोलियों ने दो जिंदगियां निगल लीं।
आजाद और प्रीती पड़ोसी थे। बचपन से ही एक दूसरे के घर आना-जाना था। दोनों हम उम्र थे। उनकी दोस्ती प्यार में बदल गई। छपाने की कोशिश की, लेकिन धीरे-धीरे पूरे गांव में बात फैल गई। तरह-तरह की बंदिशें, किस्म-किस्म के तानों को सहती प्रीती ने भी निर्णय ले लिया था कि अब चाहे जो हो जाए, शादी तो आजाद से ही करेगी। इसी बीच गांव में तनातनी होने से दोनों डर भी गए थे। जब पिछले महीने आजाद की शादी हुई तब भी प्रीती ने अपने दिल पर पत्थर रखकर इसे मंजूर कर लिया, लेकिन जब उसकी शादी तय हुई तो वह बर्दाश्त नहीं कर पाई। दोनों ने साथ जीने-मरने की पता नहीं कितनी कसमें खाई थीं। प्रीती ने आजाद को उन्हीं का वास्ता दिया।
उधर, शादी के बाद आजाद की जिंदगी भी दूभर हो गई थी। उसने घरवालों के दबाव में शादी तो कर ली, लेकिन जल्द ही उसकी पत्नी को सारी बातें मालूम हो गईं। रोज-रोज का झगड़ा, घरवालों की पंचायत से वह भी ऊब गया था। उसके ससुराल वालों को भी बातें मालूम चल गईं थी। इसी के बाद दोनों ने मौत को गले लगाना ही मुनासिब समझा। रविवार की रात तक न तो प्रीती के और न ही आजाद के घरवालों को भनक थी कि कुंछ देर बात क्या होने जा रहा है। सुबह मौत की खबर पाकर दोनों के घरवाले हतप्रभ थे। उनका कहना था कि आजाद और प्रीती के व्यवहार में कही भी नहीं लगा था कि दोनों इतना बड़ा कदम उठाने वाले हैं। आजाद ने ही कहीं से गेहूं में रखने वाली जहर की गोलियां खरीदीं। पुलिस ने सुबह उनकी तलाशी ली तो आजाद के पास जहर की शीशी बरामद हुई। उसमें चार गोलियां कम थीं।
तीन भाइयों में इकलौती बहन, घरवालों का बुरा हाल
0 प्रीती तीन भाइयों में इकलौती बहन थी। इसलिए सबकी दुलारी थी। जब आजाद के उसके संबंधों का पता चला तो घरवाले आग बबूला हो गए। उसके बाहर निकलने से लेकर मोबाइल पर बात करने पर भी तमाम बंदिशें लगा दीं। जब सुबह उन्हें प्रीती के जहर खाने की बात का पता चला तो वे भागते हुए पहुंचे। पिता पंधारी ने बताया कि प्रीती की इससे पहले भी शादी तय करने का प्रयास किया था, लेकिन बात बन नहीं पाई थी। भाइयों और मां का रो-रोकर बुरा हाल था।