नवजात बच्ची को छोड़कर
लापता हुआ प्रतापगढ़ का दंपति
बच्चा बदलने का आरोप लगाकर चिल्ड्रेन अस्पताल में काटा था बवाल
प्रयागराज। चिल्ड्रेन अस्पताल में बच्चा बदलने का आरोप लगाने वाला दंपति नवजात बच्ची को छोड़कर सोमवार सुबह अचानक चुपके से चले गया। अस्पताल कर्मियों ने उन दोनों की अस्पताल में तलाश की, लेकिन दोनों कहीं नहीं मिले। दंपति के लापता होेने पर अस्पताल प्रबंधन ने इसकी सूचना पुलिस को दी।
बता दें, प्रतापगढ़ के कुंडा साहिबापुर निवासी विनोद कुमार की पत्नी प्रीति ने 17 नवंबर को कुंडा सीएचसी में जुड़वा बच्चों को जन्म दिया था। कुछ घंटे बाद नवजात शिशुओं की हालत बिगड़ने पर उनको चिल्ड्रेन अस्पताल ले जाया गया। इलाज के दौरान एक बच्चे की मौत हो गई, जबकि दूसरे को गंभीर हालत में एनआईसीयू में रखा गया। रविवार को विनोद की बहन राजकली अस्पताल आई और बच्चे को देखने की इच्छा जताई। नर्स जैसे ही बच्चे को लेकर आई परिवारवाले भड़क गए। परिजनों का दावा है कि उनको देखने के लिए लड़की दी गई जबकि प्रीति ने दो बेटों को जन्म दिया था। विनोद व उसके परिवार वाले अस्पताल स्टाफ पर बच्चा बदलने का आरोप लगाने लगे। हंगामा करने के बाद रविवार देर-रात तक दोनों दम्पति अस्पताल में मौजूद थे लेकिन सोमवार को बिना किसी को कोई जानकारी दिए नवजात बच्ची को अकेला छोड़कर चुपचाप चले गए। चिल्ड्रेन अस्पताल अधीक्षक डॉ. अनुभा के मुताबिक उनकी तलाश के बाद जब वह दोनों नहीं मिले तब इसकी जानकारी कर्नलगंज पुलिस को दी गई जबकि नवजात बच्ची का उपचार चल रहा है।
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पड़ताल के लिए पांच सदस्यीय कमेटी गठित
प्रयागराज। पूरे मामले की जांच के लिए मोतीलाल नेहरू मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. एसपी सिंह ने पांच विशेषज्ञों की जांच कमेटी करते हुए इसे एक सप्ताह के भीतर रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है। जांच कमेटी में एसआरएन अस्पताल के एसआईसी डॉ. एके श्रीवास्तव, बीएचयू के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजनीति प्रसाद, महिला रोग विशेषज्ञ एवं विभागाध्यक्ष डा. अमृता चौरसिया, डॉ. दिलीप चौरसिया एवं फोरेंसिक विशेषज्ञ के तौर पर प्रो. राजेश राय को शामिल किया गया है। इसके पहले प्राचार्य डॉ. सिंह ने बच्चे के पिता विनोद कुमार बात करने के अलावा कुंडा सीएचसी के डॉक्टरों से भी पूरे मामले की जानकारी ली।
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फुट प्रिंट एवं डीएनए से खुलेगा राज
प्रयागराज। बच्चा बदले जाने के आरोप में कितना दम है इसका खुलासा अस्पताल में भर्ती होने वाले बच्चों के फुट प्रिंट रजिस्टर को खंगालने से हो जाएगा। बच्चे के डीएनए को भी सुरक्षित रखा गया है जिसका मिलान विनोद एवं प्रीति के साथ किया जाएगा। अमूमन जच्चा-बच्चा अस्पतालों में अकसर बच्चा बदले जाने के आरोप देखने को मिलते हैं। ऐसे में अस्पताल प्रशासन नवजात शिशुओं को भर्ती करने से पहले उनके फुट प्रिंट अपने रजिस्टर में सुरक्षित रख लेता है। प्रीति के दोनों बच्चों के भी फुट प्रिंट अस्पताल के रजिस्टर में दर्ज किए गए हैं। ऐसे में इस रजिस्टर की पड़ताल के बाद सच्चाई सामने आ सकती है। इसके अलावा नवजात बच्चे को भर्ती कराए जाते समय बनवाए गए भर्ती स्लिप को भी सुरक्षित रख लिया गया है। यह स्लिप खुद बच्चे के पिता विनोद ने भरवाई थी।