नाबालिग लडकियों को दोबारा मीरगंज भेजने की डेढ़ साल बाद मजिस्ट्रेटी जांच
दो अधिकारियों पर संगीन आरोप, बयान के लिए बुलाया गया
दोनों लड़कियों की कोई जानकारी नहीं, मचा हड़कंप
इलाहाबाद। देवरिया कांड के बाद जिले के अधिकारियों की भी नींद टूटी है। डेढ़ साल से धूल फांक रही मजिस्ट्रेटी जांच की फाइल फिर खोल दी गई है। 2016 में मीरगंज से दो किशोरियों को छुड़ाया गया था। दो अधिकारियों पर आरोप था कि उन्होंने दोनों लड़कियों को रुपये के लालच में छुड़वाकर वापस रेड लाइट एरिया मीरगंज भेजवा दिया। इस पूरे कांड की 2017 में मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए थे लेकिन जांच अब शुरू हुुई है। 16 अगस्त तक कोई भी एसीएम द्वितीय के कार्यालय में बयान दर्ज करा सकता है।
एसीएम द्वितीय गौरव श्रीवास्तव के मुताबिक चार नवंबर 2016 को मीरगंज के रेड लाइट एरिया से नौ बच्चों को पकड़ा गया था। उसमें दो किशोरियां थीं जिनकी उम्र उस वक्त 15 साल की थी। उनकी मां को नारी संरक्षण गृह आगरा में भेज दिया गया था जबकि दोनों लड़कियों और सात नाबालिग लड़कों को बाल गृह बालिका और बाल गृह शिशु में भेज दिया गया था। आरोप है कि दो अधिकारियों ने चंद पैसों के लालच में दोनों लड़कियों को दोबारा मीरगंज में भेज दिया था। इसके बाद से लड़कियों का कुछ पता नहीं। इसकी मजिस्ट्रेटी जांच के आदेश दिए गए थे लेकिन मामला ठंडे बस्ते में चला गया। अब देवरिया कांड के बाद इस मामले की जांच शुरू कर दी गई है। एसीएम के मुताबिक दोनों लड़कियां और मां कहां है, इस बात की जानकारी नहीं है। जिन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्हें बयान के लिए बुलाया गया है। इसके अलावा इस मामले में जिसे भी बयान दर्ज कराना हो, वह 16 अगस्त तक उनके कार्यालय में बयान दर्ज करा सकता है।