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20 हजार करोड़ से अधिक है बालू का कारोबार

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दो हजार करोड़ से ज्यादा का है ‘लाल सोने’ का कारोबार
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करीब डेढ़ सौ करोड़ रुपये तो रायल्टी के रूप में सरकार के खजाने में गया है
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। हजारों एकड़ में फैला बालू का कारोबार खूनी संघर्ष और तनाव का पर्याय बन गया है। इसकी मुख्य वजह वैध पट्टों के पीछे छिपा अरबों रुपये का अवैध कारोबार है। अफसरों का ही मानना है कि बालू का कुल कारोबार 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है। नदियों में डूबे ‘लाल सोना’ के वैध और अवैध कारोबार पर बालू माफियाओं का कब्जा है और बीच में आने वाला रोड़ा हटाने के लिए वे किसी भी हद तक जाने के लिए तैयार हैं। हालांकि, हंडिया में बालू के कारोबारी को जलाए जाने की घटना का कारण अभी तक स्पष्ट नहीं है लेकिन इस धंधे में ऐसी घटनाएं कोई नई बात नहीं है।
इलाहाबाद में गंगा और यमुना के अलावा सोनभद्र की पहाड़ियों से भी कई छोटी नदियां आती हैं। इनके बालू की अधिक मांग है। यही वजह है कि बालू के ज्यादातर पट्टे यमुना पार में हैं। इसके अलावा गंगापार में हंडिया, कोटवां, हनुमानगंज बालू खनन के मुख्य क्षेत्र हैं। पिछले साल जिले में कुल दो दर्जन स्थानों पर खनन का पट्टा जारी हुआ था लेकिन इस बार 51 स्थान चिह्नित किए गए। यानी, दायरा दोगुना से भी अधिक हो गया। हालांकि राजस्व बढ़ाने की सरकार की इस कवायद से अवैध कारोबार पर अंकुश लगने के दावे भी किए जा रहे हैं लेकिन सीमा को लेकर तनाव ज्यादा बढ़ गया है। इसके अलावा बालू माफियाओं ने नदी के भीतर तक खनन शुरू कर दिया है। ऐसे में संघर्ष की आशंकाएं और बढ़ गई हैं।
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रायल्टी के रूप में ही मिल गए 90 करोड़
0 सरकार को इस बार 90 करोड़ रुपये सिर्फ बालू पट्टा के रायल्टी से मिले हैं। यहां 51 स्थानों पर पट्टा होना है। इनमें से 44 का पट्टा हो चुका है। पहली बार ई-नीलामी की व्यवस्था लागू की गई। खास यह भी रहा कि इस बार प्रति घनमीटर बालू की नीलामी की गई। जबकि, पूर्व के वर्षों में एक स्थान पर बालू की अनुमानित कुल उपलब्धता के हिसाब से बोली लगती थी।
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सीज बालू से 50 करोड़ रुपये का राजस्व
रायल्टी के अलावा इस बार सीज बालू की नीलामी से भी सरकार के राजस्व में बढ़ोतरी हुई है। चूंकि पिछले साल नई सरकार ने बालू खनन पर रोक लगा दी थी। ऐसे में अवैध खनन का धंधा जोरों पर चला। इसका नतीजा रहा कि माफियाओं ने पूरे यमुना पार क्षेत्र में लाखों घनमीटर बालू डंप कर लिया। बाद में सरकार की ओर से चलाए गए अभियान में इन्हें सीज कर दिया। इनकी नीलामी से सरकार को 50 करोड़ रुपये से अधिक की प्राप्ति हुई है।
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वैध के पीछे होता है बालू का अवैध कारोबार
खनन विभाग के एक अफसर के अनुसार डेढ़ अरब रुपये तो सरकार को राजस्व प्राप्त हुआ है। इसके बाद पांच गुना से भी अधिक दाम पर बालू की बिक्री की जाती है। इसमें रवान्ना जारी करने की कीमत, भाड़ा समेत अन्य खर्च शामिल हैं। उनका कहना है इसके बाद असली खेल बालू के अवैध कारोबार का है। यह कारोबार कई गुना है और कुल व्यापार 20 हजार करोड़ रुपये से अधिक का माना जाता है।
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