झारखंड-बिहार के साइबर ठगों ने इलाहाबादियों से ठगे एक करोड़
आठ महीने में 468 पीड़ितों ने दर्ज कराए मुकदमे
सिविल लाइंस, कर्नलगंज, जार्जटाउन, धूमनगंज और कैंट में सर्वाधिक मुकदमे
बैंकों में दर्ज शिकायतें अलग से, 55 मामलों ने बैंकों ने साइबर सेल की ली मदद
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
इस साल के आठ महीनों में झारखंड और बिहार के साइबर ठगों ने इलाहाबादियों से करीब एक करोड़ रुपये ठग लिए। यह रकम लोगों से एटीएम कार्ड की वैधता खत्म होने या फिर वेरिफिकेशन के नाम पर कार्ड का ब्योरा लेकर ठगी है। बातों ही बातों में एटीएम और ओटीपी नंबर भी लेकर एक झटके में इस रकम से शापिंग कर ली या फिर ई: वैलट में इस रकम को जमा करा लिया। पुलिस के साइबर सेल की ओर से किए गए प्रयासों से मात्र साढ़े पांच लाख रुपये ही लोगों के खातों में वापस आए हैं। 95 लाख रुपये की वापसी के लिए कानूनी कार्रवाई की जा रही है लेकिन उम्मीद नहीं है। हालांकि साइबर सेल ने ठगी में इस्तेमाल होने वाले मोबाइल नंबर, मेल आईडी, स्थान सहित सभी जानकारियां जुटा लीं हैं। इन जानकारियों के आधार पर यूपी पुलिस को बिहार और झारखंड की पुलिस से मदद नहीं मिल पा रही है।
जनवरी से लेकर अगस्त तक साइबर सेल की जांच में खुलासा हुआ है कि 468 शिकायतों में से 80 फीसदी लोगों को एयरटेल कंपनी के मोबाइल नंबरों से ठगा गया है। 15 फीसदी ठगी वोडाफोन तथा शेष पांच फीसदी लोग जियो और एयरसेल तथा अन्य कंपनियों के नंबरों से काल करके ठगे जा चुके हैं। इन नंबरों का इस्तेमाल झाखंड जिले के जामतारा व गिरडीह तथा बिहार के जमुही जिलों से किया गया है। इलाहाबाद के एसपी क्राइम ने तीन बार इन प्रांतों को पुलिस टीम भेजी लेकिन वहां से एसपी की ओर से मदद नहीं मिली। जिले की बैंकों में उपभोक्ताओं ने सीधे तौर पर काफी शिकायतें दर्ज कराईं हैं। उनमें से 55 में बैंकों ने साइबर सेल से एफआईआर दर्ज कराके या फिर सामान्य प्रार्थनापत्र देकर मदद मांगी है।
यूपी ने बिहार और झारखंड से मांगी मदद
इलाहाबाद।
इलाहाबाद, बनारस सहित प्रदेश के 22 जिलों के एसएसपी के अनुरोध पर यूपी के डीजीपी ने झारखंड और बिहार सरकार से उनके तीन जिलों में बैठकर नेटवर्क संचालित करने साइबर ठगों पर शिकंजा कसने के लिए मदद मांगी है। डीजीपी ने साइबर क्राइम रोकने को तीनों प्रांतों के बीच ुपुलिस अधिकारियों की टीम बनाने की सलाह दी है। जिससे कि अपराधों पर अंकुश लग सके।
ये है आरबीआई का नियम
-आबीआई के अनुसार ुपीड़ित खातेदार 48 घंटे से पहले साइबर धोखाधड़ी की बैंक को सुूचना देंगे तो उनकी रकम खाते में वापस आ सकती है। क्योंकि बैंक खाते से 48 घंटे बाद ही धनराशि दूसरे खाते में हस्तांतरित करती है। समय से शिकायत दर्ज कराने वालों की मदद के लिए बैंक बाध्य हैं। बैंक मदद न करें तो पीड़ित व्यक्ति आरबीआई में बैंक के खिलाफ साक्ष्यों के साथ शिकायत दर्ज करा सकता है।
केस
1-करछना निनासी रवि शंकर से 13 सितंबर को करछाना एसबीआई के एटीएम वेरिफिकेशन के नाम पर काल करके बातों ही बातों में ओटीपी कोड़ पूछ लिया और 50 हजार रुपये निकल गए। साइबर क्राइम आफिस में शिकायत कराने पर पता चला कि इस राशि से तो झारखंड जिले के जामतारा जिले के एयरटेल नंबर से काल आई थी। उसने इस राशि से आन लाइन खरीददारी कर ली।
2- सिविल लाइंस के राघवेंद्र विक्रम का खाते और एटीएम का ब्योरा लेकर साइबर ठगों ने उनके एसबीआई खाते से 30 हजार रुपये की आन लाइन खरीददारी कर ली।
3. एसबीआई की इलाहाबाद विवि ब्रांच से छात्र परविंद सिंह यादव के खाते से क्रेडिट कार्ड वेरिफिकेशन के नाम पर दो बार में नौ हजार रुपये निकल गए। साइूबर क्राइम सेल में जांच के दौरान पता चला कि इस राशि से झारखंड में आन लाइन खरीद कर ली गई।
‘पिछले कुछ महीनों में साइबर ठगी की घटनाएं ज्यादा हुईं हैं। बिहार और झारखंड के तीन जिलों में सक्रिय ठगों के गैंग के खिलाफ कार्रवाई के प्रयास किए जा रहे हैं। तीनों प्रांतों की सरकार भी ठगी रोकने को आपस में रणनीति तैयार कर रहीं हैं। लोगों को सलाह दी जाती है कि वह अपने एटीएम कार्ड, ओटीपी और पिन नंबर किसी तो न बताएं।’ बीके मिश्रा, एसपी क्राइम