एनसीसी की परीक्षा में भिड़े सीओ-एसोसिएट अफसर
0 एसोएिटट अफसर ने सीओ पर लगाया बदसलूकी करने का आरोप
0 बीच में ड्यूटी छोड़ने पर सीओ ने एसोसिएट अफसर के खिलाफ दी रिपोर्ट
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। एनसीसी के ‘बी’ प्रमाणपत्र की रविवार को आयोजित परीक्षा के दौरान परीक्षा प्रभारी एवं एसोसिएट एनसीसी अफसर आपस में भिड़ गए। एसोसिएट अफसर का आरोप है कि परीक्षा प्रभारी ने उनसे बदसलूकी की। वहीं, परीक्षा प्रभारी का आरोप है कि एसोसिएट अफसर ने अनुशासन तोड़ा और परीक्षा बीच में ही छोड़कर चले गए। एसोसिएट अफसर ने ग्रुप कमांडर से मामले की शिकायत की है तो परीक्षा प्रभारी ने भी एसोसिएट अफसर के खिलाफ रिपोर्ट ऊपर भेज दी है।
एनसीसी की परीक्षा में अग्रसेन इंटर कॉलेज में प्रवक्ता एवं एसोसिएट एनसीसी अफसर कैप्टन डॉ. विजय राज यादव की ड्यूटी भी लगी थी। विजय राज का आरोप है कि परीक्षा से पहले वह अपनी बटालियन के सभी कैडेट्स को व्यवस्थित रूप से बैठा चुके थे, जबकि अन्य बटालियन के कैडेट्स पूरी तरह से व्यवस्थित नहीं हो पाए थे। इस बीच सुबह तकरीबन 9.30 बजे परीक्षा प्रभारी 15 यूपी बटालियन के सीओ कर्नल प्रफुल्ल सिंह वहां आ गए और विजय पर चिल्लाते हुए अमर्यादित शब्दों का प्रयोग करने लगे। विजय का कहना है कि जब उन्होंने इसका विरोध किया तो सीओ ने गालीगलौज की और एनसीसी से निकलवाने की धमकी देने लगे। विजय राज ने ग्रुप कमांडर को पत्र भेजकर शिकायत दर्ज कराई है और मामले में न्यायोचित कार्रवाई की मांग की। विजय का कहना है कि वह एसोसिएट अफसर के साथ एक शिक्षक भी हैं। सीओ का यह आचरण शिक्षक मर्यादा एवं गरिमा को तार-तार करने वाला है।
उधर, सीओ कर्नल प्रफुल्ल सिंह का कहना है कि वह जब मौके पर पहुंचे तो देखा विजय राज यादव पीछे खड़े होकर किसी से बात कर रहे थे और वहां सब कुछ अव्यवस्थित था। उन्होंने विजय से आगे आने को कहा और यह भी कहा कि बात बाद में कर लें, पहले काम जरूरी है। विजय यूनिफॉर्म में थे लेकिन उनके खड़े होने का तरीका ठीक नहीं था। सेना में इसे अनुशासनहीनता कहते हैं। वहां 300 कैडेट्स मौजूद थे, वह क्या सीखेंगे। उन्होंने विजय से सिर्फ इतना कहा कि यूनिफॉर्म में हैं, सो अनुशासित तरीके से खड़े हों। हो सकता है यह बात उन्हें अच्छी न लगी हो। मैंने कोई गाली नहीं दी और 300 कैडेट्स इसके गवाह हैं। विजय को टोकने पर वह बिना बताए परीक्षा बीच में छोड़कर चले गए। इस बाबत रिपोर्ट ऊपर भेज दी गई है। अगर मामले में कोर्ट ऑफ इंक्वायरी होती है और विजय गलत पाए जाते हैं तो उन्हें कमीशन त्यागना होगा।