हाईकोर्ट से पांच साल के कारावास की सजा पाने वाला अपराधी पूरे 29 साल तक कानून की आंख में धूल झोंक कर फरार रहा। पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल नहीं भेज सकी। इस दौरान अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेजने के लिए अदालत से लगातार आदेश जारी होते रहे। आखिरकार अभियुक्त यूनुस पुलिस के हत्थे चढ़ा तो उसे मंगलवार का एडीजे रमेश चंद्र की अदालत में पेश किया गया। सजा भुगतने के लिए कोर्ट ने उसे नैनी जेल भेजने का आदेश दिया है।
अभियोजन के अनुसार बम्हरौली निवासी हवीब खां ने तीन अक्टूबर 1976 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि युनूस उसकी लड़की से शादी करना चाहता था जिसके लिए काफी दबाव डाल रहा था। वादी ने अपनी लड़की को उसकी बड़ी बहन के घर बरेठी भेज दिया था जिससे नाराज होकर अन्य सह अभियुक्तों के साथ उसके घर पर आया और गाली देने लगा। उसी समय उसका एक दामाद नन्हे आ गया और बीच बचाव करने लगा तो यूनुस ने नन्हे को पेट में चाकू मार दिया, जिसकी अस्पताल ले जाते समय मौत हो गई थी। सेशन कोर्ट ने हत्या का आरोप साबित पाते हुए छह फरवरी 1978 को नन्हे को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। अन्य अभियुक्त दोषमुक्त हो गए थे।
अभियुक्त यूनुस ने उम्रकैद की सजा के खिलाफ उच्च न्यायालय में अपील की थी जहां से उसे जमानत मिल गई और वह जेल से 15 फरवरी 1978 को रिहा हो गया था। बाद में उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त और न्यायमूर्ति हरिश्चंद्र मित्तल ने तीन नवंबर 1987 को अपील का निस्तारण करते हुए उम्रकैद की सजा निरस्त कर दी और गैरइरादतन हत्या के आरोप में पांच साल की सजा भुगतने का आदेश दिया था। मगर तब तक यूनुस फरार हो चुका था। उच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन के लिए एडीजे कोर्ट से बराबर आदेश जारी होता रहा है। मंगलवार को अभियुक्त को गिरफ्तार कर पेश किया गया।