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झूंसी में ढाई हजार रूपये में बनाया जाता था डॉक्टर

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झूंसी में ढाई हजार रुपये में बनाया जाता था डॉक्टर
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पहले भी फर्जी संस्थाओं ने झूंसी में दफ्तर खोलकर की है धोखाधड़ी
ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के नाम पर बनाया गया था फर्जी डॉक्टर
पांच साल पहले कुटीर उद्योग के नाम पर लोग हुए थे धोखाधड़ी का शिकार
अगरबत्ती उद्योग में निवेश करा लाखों रुपये लेकर भागा था संचालक
अमर उजाला ब्यूरो
झूंसी।
फर्जी कंपनी अलगल्फ नेट की तर्ज पर इलाके में इसके पहले भी धोखाधड़ी का लंबा कारोबार हो चुका है। तकरीबन पांच साल पहले एक संस्था ने झूंसी में अपना दफ्तर खोला था। संस्था से जुड़ने वालों को महज ढाई हजार रूपये में चिकित्सक बना दिया जाता था। संस्था ने लोगों से रूपये लेकर इलाहाबाद के विभिन्न विकास खंड की ग्रामसभाओं में अपने बनाए चिकित्सक तैनात किए थे। संस्था ने जुड़ने वालों से दावा किया था कि इसके बदले उन्हें हर माह मोटी तनख्वाह दी जाएगी। पर कुछ ही दिन में संस्था की असलियत खुल गई। इसके बाद लोगों ने जमकर बवाल काटा। मामला पुलिस और स्वास्थ्य विभाग तक पहुंचा तो संस्था रातों-रात बोरिया-बिस्तर बांधकर फरार हो गई।
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इसी प्रकार तकरीबन चार साल पहले कुटीर उद्योग के नाम पर सैकड़ों लोगों से अगरबत्ती के धंधे में पैसा लगवाया गया था। संस्था ने आवास विकास कालोनी योजना तीन में अपना दफ्तर खोल रखा था। इसमें प्रत्येक निवेशक से तीन हजार रूपये लिए गए थे। कहा गया कि इसके बदले उन्हें अगरबत्ती बनाने का कच्चा माल दिया जाएगा। माल तैयार कर डिलेवरी के बाद रूपया दिया जाएगा। शुरू में कारोबारी ने निवेशकों को वादे के मुताबिक पैसे भी दिए लेकिन मौका पाकर तकरीबन 75 लाख रुपये बांधकर संस्था रातों-रात फरार हो गई। मामला पुलिस तक भी पहुंचा था लेकिन कुछ दिन की सक्रियता के बाद सबकुछ ठंडा पड़ गया। तकरीबन पांच साल पहले आवास विकास कालोनी योजना दो में एक संस्था ने अपना दफ्तर खोला था। स्वास्थ्य विभाग से रजिस्ट्रेशन का दावा करने वाली उक्त संस्था इलाहाबाद के सभी विकास खंड की प्रत्येक ग्रामसभा में एक सर्वेयर को नियुक्त करती थी। रजिस्ट्रेशन के नाम पर ढाई हजार रुपये लेकर लोगों को संस्था का सदस्य बनाया जाता और गांव में नियुक्ति दे दी जाती थी। संस्था की ओर से गांव में इन्हें तनख्वाह पर बतौर चिकित्सक नियुक्त किया जाता था। इनका काम ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना था। निवेशकों को नियुक्ति के कई माह बाद भी तनख्वाह नहीं मिली तो वे संस्था के दफ्तर पहुंचे तथा जमकर हंगामा काटा। मामला थाने तक पहुंचा तो पुलिस मौके पर पहुंची। बाद में सीएमओ के निर्देश पर स्वास्थ्य विभाग ने भी जांच-पड़ताल की। इसी बीच संस्था दफ्तर पर ताला मारकर रातोंरात फरार हो गई।
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