फर्जीवाड़े में शुआट्स का फरार पीआरओ निलंबित
2014 में डायोसिस ऑफ लखनऊ की संपत्ति की धोखाधड़ी का मामला
शुआट्स प्रशासन ने फरारी के दौरान पांच महीने का वेतन भी दिया
कमिश्नर और आईजी से शिकायत के बाद वीसी कार्रवाई में जुटे
अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद।
डायोसिस ऑफ लखनऊ की संपत्ति के फर्जीवाड़े के आरोपी शुआट्स के पीआरओ रमाकांत दुबे को विवि प्रशासन ने निलंबित करने का निर्णय लिया है। यह कार्रवाई कमिश्नर और आईजी से शिकायत के बाद की गई है। शिकायत में कहा गया है कि अदालत के आदेश के बाद पीआरओ को फरार घोषित किया गया है, लेकिन उनकी शुआट्स में हाजिरी लगती रही और वेतन भी मिलता रहा। इस खबर के बाद रजिस्ट्रार और वीसी ने फिलहाल वेतन रोकने के आदेश कर दिए हैं। मगर वीसी का कहना है कि फरार होने के कारण आदेश तामील नहीं हो पाया है। ऐसे में निलंबन आदेश पीआरओ के आवास पर चस्पा कर दिया जाएगा। वेतन अब तक कैसे मिलता रहा, इस बारे में शुआट्स प्रशासन से जवाब मांगा गया है।
थाना सिविल लाइंस में डायोसिस ऑफ लखनऊ की प्रापर्टी में फर्जीवाड़ा, अभिलेखों की हेराफेरी कर कई करोड़ के गोलमाल की रिपोर्ट 2014 में सिविल लाइंस थाने में दर्ज कराई गई थी। जिसमें शुआट्स के तत्कालीन निदेशक प्रशासन विनोद बी लाल सहित डेनियल सुभान, शुआट्स के पीआरओ राम कुमार दुबे को नामजद किया गया था। विनोद बी लाल इस प्रकरण में हाईकोर्ट से स्टे ले आए थे। जबकि डेनियल सुभान जेल में है। कोर्ट ने पीआरओ रमाकांत दुबे को फरार घोषित कर दिया। आरोप है कि इन लोगों ने डायोसिस ऑफ लखनऊ की कई करोड़ की संपत्ति को खुर्द बुर्द करने के लिए फर्जी अभिलेख तैयार किए हैं। काफी संपत्ति भी हड़प ली।
फरार होने के बावजूद शुआट्स के अभिलेखों में पीआरओ ड्यूटी पर बने रहे और उनको पांच महीने तक वेतन मिलता रहा। कमिश्नर और आईजी के स्तर पर शिकायत होने के बाद शुआट्स प्रशासन में हड़कंप मच गया।आनन-फानन में वीसी प्रोफेसर नाहर सिंह ने वेतन रोकने के आदेश वित्त नियंत्रक को जारी कर दिए हैं। साथ ही अब वेतन किस आधार पर निकलता रहा, इस बारे में युनिवर्सिटी प्रशासन से जवाब तलब किया है।
‘फरार पीआरओ का वेतन रोकने के साथ-साथ उनके खिलाफ निलंबन का निर्णय ले लिया गया है। विवि परिसर में न होने के कारण निलंबन आदेश उनके आवास पर तामील करा दिया जाएगा।’ प्रोफेसर नाहर सिंह, कुलपति, शुआट्स