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आए दिन होने वाली कलह ने बना दिया दरिंदा

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आए दिन होने वाली कलह ने बना दिया दरिंदा
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अक्सर विवाद का रूप ले लेती थी दोनों की नोकझोंक
तीन बेटियां होने के बाद भी लापरवाह बना रहा मनोज
इसी बात को लेकर श्वेता रहती थी पति से नाराज

अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। तमाम सवालों-जवाबों के बीच आखिरकार यही बात सामने आई पीपलगांव में रहने वाले मनोज को आए दिन होने वाली कलह ने दरिंदा बना दिया। पुलिस की मानेें तो यह कलह मनोज के लापरवाही भरी रवैये की उपज थी। तीन बेटियां होने के बाद भी उसके पास कमाई का नियमित साधन नहीं था। इसे लेकर श्वेता जब भी शिकायत करती, मनोज उससे झगड़ बैठता। माना जा रहा है कि घटना वाली रात भी कुछ ऐसा ही हुआ। जिसके बाद मनोज दरिंदा बन बैठा।
मनोज व श्वेता की शादी कई साल पहले हुई थी। बड़ी बेटी सृष्टि आठ साल की थी। इसके बाद श्वेता ने दो और बेटियों को जन्म दिया। पुलिस की मानें तो तीन बेटियां होने के बाद भी मनोज जिम्मेदारियों से मुंह मोड़े रहा। हाल यह था कि मौजूदा समय में भी पिता गुलाबचंद ही उसका और उसके परिवार का खर्च उठा रहा था। गुलाबचंद ने खुद पुलिस अफसरों के सामने यह बात कबूल की थी। पुलिस के मुताबिक, परिवारवालों का कहना है कि बहुत कहने के बाद एक-दो बार मनोज ने कुछ काम शुरू किया लेकिन किस्मत ने उसका साथ नहीं दिया। जिसके बाद उसने प्रयास करने भी छोड़ दिए। इधर श्वेता बेटियों के भविष्य को लेकर चिंंतित थी। यही वजह थी कि वह अक्सर मनोज से उसके लापरवाह रवैये को लेकर शिकायत करती। जिस पर मनोज झगड़ उठता था। आए दिन दोनों के बीच नोकझोंक होती थी जो देखते ही देखते विवाद का रूप ले लेती थी।
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पुलिस ने बताया कि पूछताछ में पता चला है कि कई बार ऐसा होता था कि झगड़े के बाद पति या पत्नी दो-दो दिन तक बिना खाना खाए रह जाते थे। माना जा रहा है कि सोमवार को हुई घटना से पहले भी ऐसा ही कुछ हुआ होगा। इस अनुमान को पुख्ता करने वाली बात यह है कि मरने से पहले बच्चों और मनोज ने तो खाना खाया था। लेकिन श्वेता ने खाना नहीं खाया था। दरअसल पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरोें को बच्चों व मनोज के पेट में खाना मिला लेकिन श्वेता के पेट में नहीं।


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दूसरी खबर

मानसिक बीमारी के प्रभाव में था मनोज

मनोचिकित्सकों ने कहा, सामान्य नहीं है इस तरह का व्यवहार


अमर उजाला ब्यूरो
इलाहाबाद। पुलिस भले ही वारदात की वजह घरेलू कलह मान रही हो लेकिन मनोचिकित्सकों का मानना कुछ और ही है। उनका कहना है कि जिस तरीके से मनोज ने हत्या के बाद जिस तरह से लाशें छिपाईं, उससे हो सकता है कि वह किसी मानसिक बीमारी के प्रभाव में था। अब यह जांच का विषय है कि इसकी शुरुआत कब से हुई।
मनोज ने हत्या के बाद पत्नी श्वेता की लाश फ्रिज में छिपा दी थी। जबकि बड़ी बेटी सृष्टि की लाश अलमारी व मझली शिवानी की लाश अटैची में रख दी थी। उसके ऐसा करने के पीछे पुलिस की थ्योरी है कि वह एक-एक करके पत्नी व बेटियों को मौत के घाट उतारता गया। साथ ही किसी को भनक न लगे या लाश देखकर कोई चीखे नहीं, इसलिए उसने लाशें छिपाईं। हालांकि मनोचिकित्सकों का मानना इससे इतर है। उनका कहना है कि घरेलू कलह की वजह से एक साथ चार-चार हत्याएं कर देना किसी सामान्य व्यक्ति का काम नहीं हो सकता। हो सकता है कि वह किसी मानसिक रोग के प्रभाव में हो।
दरअसल पुलिस को जांच पड़ताल के दौरान पता चला है कि मनोज काफी उग्र था। बात बात में वह गुस्सा हो जाता था। जरी सी बात पर भी उसकी पत्नी से नोकझोंक हो जाती थी। यहां तक कि वह बेटियों को भी डांटने लगता था। मोहल्ले के लोगों से पूछताछ में भी इस तरह की बातेें सामने आई हैं। मनोचिकित्सकों का कहना है कि हो सकता है कि कई बार किसी काम में अपेक्षित सफलता न मिलने से व्यक्ति अवसाद में चला जाता है। जल्द ही वह इस मनोस्थिति से बाहर नहीं आए तो वह मानसिक बीमारी की चपेट में आने लगता है। जैसा कि मनोज के व्यवहार के बारे में बताया जा रहा है, उससे साफ है कि वह किसी न किसी तनाव में जरूर था।

एक रिपोर्ट कहती है कि आज ज्यादातर लोग किसी न किसी मानसिक बीमारी की चपेट में जरूर हैं। व्यवहार में अचानक आया परिवर्तन इस बात का भी सूचक हो सकता है कि व्यक्ति किसी मानसिक बीमारी के प्रभाव में है।
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डॉ. सौरभ टंडन, मनोचिकित्सक

मनोज ने जो किया वह सामान्य अवचेतन का व्यक्ति नहीं कर सकता। हो सकता है कि वह किसी इंपल्सिव साइकियाट्रिक डिसीज की चपेट में हो। वरना झगड़े को लेकर एक साथ चार लोगों को मार देना कहीं से भी सामान्य नहीं है।
डॉ. वीके सिंह, मनोचिकित्सक
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