इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पति की ओर से प्रस्तुत सीडी/डीवीडी की फोरेंसिक जांच का निर्देश दिया है, जिसमें आरोप है कि उसकी पत्नी सेक्स रैकेट चलाती है और पोर्नोग्राफी में भी शामिल है। पति ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 के तहत दायर तलाक और अपनी दो नाबालिग बेटियों की कस्टडी के लिए दायर मुकदमे में साक्ष्य के तौर पर सीडी प्रस्तुत करना चाहता है।
कानपुर नगर के रहने वाले एक व्यक्ति ने पारिवारिक न्यायाधीश कानपुर नगर के समक्ष तलाक के लिए वाद दायर किया था। पत्नी पर कई आरोप लगाते हुए सीडी/डीवीडी प्रस्तुत कर जांच कराने की मांग की। पारिवारिक न्यायालय के आदेश से फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, यूपी, लखनऊ को भेज कर जांच कराई गई। इसके बाद याचिकाकर्ता ने आवेदन दिया कि अगर फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी, लखनऊ डीवीडी की जांच करके रिपोर्ट नहीं भेज सकती है, तो इसे किसी दूसरी एजेंसी को भेजा जाना चाहिए। फैमिली कोर्ट ने जनवरी 2023 के आदेश के तहत इस आवेदन को खारिज कर दिया और इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
याची की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, पारिवारिक न्यायालय के आदेश को रद्द कर दिया। निर्देश दिया कि वे ऑडियो और वीडियो दोनों सीडी/डीवीडी की फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला, कर्नाटक, बेंगलुरू द्वारा नए सिरे से जांच कराएं।