हाईकोर्ट ने सिविल प्रकृति के विवाद में आपराधिक केस दर्ज करने पर नाराजगी जताई है। साथ ही एसपी हापुड़ को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। वहीं, केस दर्ज करने करने वाले हापुड़ नगर के थाना प्रभारी विवेक चौहान से स्पष्टीकरण मांगा है। कोर्ट ने याची ओमवीर व अन्य चार लोगों के खिलाफ मुकदमे में गिरफ्तारी पर रोक लगा दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति अरविंद सिंह सांगवान और न्यायमूर्ति राम मनोहर नारायण मिश्रा की खंडपीठ ने दिया है।
याची के वरिष्ठ अधिवक्ता अनूप त्रिवेदी ने दलील दी कि विपक्षी शिकायतकर्ता और याची के बीच एक जमीन की रजिस्ट्री को लेकर सिविल विवाद चल रहा है। इस मामले में शिकायतकर्ता ने सिविल सूट दाखिल किया जो उसके पक्ष में डिग्री हो गया। इसके खिलाफ याची ने भी ऊपर की अदालत में सिविल सूट दाखिल किया है। इस दौरान शिकायतकर्ता के प्रार्थना पत्र पर थाना अध्यक्ष विवेक चौहान ने याचियों के खिलाफ धोखाधड़ी, कूट रचना व दस्तावेजों में हेरफेर का मुकदमा दर्ज कर लिया।
वरिष्ठ अधिवक्ता ने दलील दी कि एक मई 2024 से सिविल प्रकृति के सभी मामलों में मुकदमा दर्ज करने से पहले डीजीसी क्रिमिनल की विधिक राय लेने को अनिवार्य कर दिया है। थाना प्रभारी ने हाईकोर्ट के इस आदेश की अनदेखी की है। कोर्ट ने इस मामले में सभी पक्षों को नोटिस जारी करते हुए एसपी हापुड़ को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है। साथ ही कोर्ट ने याचियों के विरुद्ध उत्पीड़नात्मक कार्रवाई पर रोक लगा दी है।