सरायइनायत निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस अफसरों को सूचना दी कि बीबीपुर निवासी एक दंपति बाहर से लौटा है। गांव वालों ने जांच कराने को कहा तो महिला अपने पति के साथ मायके रमईपुर जाकर रहने लगी। दंपति की कोरोना संबंधी जांच कराई जानी जरूरी है। बाद में पता चला कि महिला जिले में ही रहने वाले अपने रिश्तेदार के घर गई थी।
केस दो- फूलपुर निवासी एक व्यक्ति ने पुलिस को सूचना दी कि कोनार गांव में दिल्ली से एक महिला आई है जिसने अब तक अपनी कोरोना संबंधी जांच नहीं कराई है। इससे गांव की लोगों के संक्रमित होने का खतरा है। मामले में फूलपुर पुलिस का कहना है की जांच में सूचना झूठी निकली।
कोरोना का खौफ जिले में रहने वाले बहुत से लोगों के सिर चढ़कर बोल रहा है।। हाल यह है कि वह हर किसी को संदिग्ध समझ ले रहे हैं। पुलिस के पास लगातार पहुंच रही सूचनाएं इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जिसमें जांच के बाद ज्यादातर मामले गलत पाए गए । ऐसे में लोगों को अलर्ट रहने के साथ ही पुलिस अफसर इस बात के लिए भी जागरूक कर रहे हैं कि वह बेवजह किसी पर शक ना करें। एक दिन पहले स्टैनली रोड पर स्थित मोहक हॉस्पिटल में पहुंचे मंदबुद्धि युवक को लोगों ने कोरोना संदिग्ध समझकर खदेड़ लिया।
सूचना पर पुलिस के साथ ही स्वास्थ्य विभाग की टीम पहुंची लेकिन जांच के दौरान युवक में कोरोना के कोई भी लक्षण नहीं मिले। पुलिस ने जानकारी जुटाई तो पता चला कि वह मंफोर्डगंज का निवासी मेहताब है जिसके माता पिता का निधन हो चुका है और वह अपने ताऊ के घर रहता है। पुलिस ने इसके बाद उसे घर तक पहुंचाया। तीन दिन पहले करेली के उमरी पुर गांव में कुर्ता-पैजामा पहन कर घूम रहे कुछ युवकों को स्थानीय लोगों ने जमाती समझ लिया।
उन्होंने इसकी सूचना पुलिस को देकर कार्रवाई की मांग की। मौके पर करेली पुलिस पहुंची तो पता चला कि युवक आसपास के क्षेत्रों के रहने वाले हैं और उनका जमात से दूर-दूर तक कोई लेना-देना नहीं था। लगातार ऐसे मामले सामने आने के बाद पुलिस भी परेशान है। पुलिसकर्मियों का कहना है कि इससे उनका वक्त बर्बाद होता है, बेवजह सनसनी का माहौल भी पैदा होता है। यही वजह है कि लोगों को अलर्ट रहने को कहा जा रहा है लेकिन उनसे यह भी अपील की जा रही है कि वह बेवजह किसी पर शक ना करें। पुलिस अफसरों का कहना है कि झूठी सूचना देने के मामले में कार्रवाई भी की जा सकती है। ऐसे में सही जानकारी ही पुलिस के साथ साझा करें।