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Prayagraj News: आयोग ने नहीं कराई एफआईआर, उठे सवाल

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समीक्षा अधिकारी (आरओ)/सहायक समीक्षा अधिकारी (एआरओ) प्रारंभिक परीक्षा-2023 में पेपर लीक विवाद सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश लोक सेवा (यूपीपीएससी) की ओर से अब तक एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई है। ऐसे में अभ्यर्थी आयोग की मंशा पर ही सवाल उठा रहे हैं।
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अभ्यर्थियों का कहना है कि जब साक्ष्य सामने हैं तो आयोग कोई ठोस कदम उठाने से क्याें कतरा रहा है। अभ्यर्थियों की ओर से आयोग को हलफनामे के साथ पेपर लीक के साक्ष्य सौंपे गए हैं। व्हाट्सएप के स्क्रीनशॉट भेजे गए हैं, जिनके अनुसार दोनों पालियों के प्रश्नपत्र परीक्षा से तकरीबन डेढ़ से दो घंटे पहले वायरल हो गए थे। पूर्व की परीक्षाओं में पेपर वायरल होने की घटना के बाद आयोग की ओर से एफआईआर दर्ज कराई गई थी लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ।
उधर, पूर्व आईपीएस अधिकारी एवं आजाद अधिकार सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमिताभ ठाकुर ने आरओ/एआरओ प्रारंभिक परीक्षा में पेपर लीक होने के संबंध में सीधे सबूत प्रस्तुत करते हुए शासन और आयोग से परीक्षा निरस्त कराए जाने और इस संबंध में एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच कराए जाने की मांग की है।
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नियुक्ति विभाग के अपर मुख्य सचिव और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग के सचिव को भेजे अपने पत्र में अमिताभ ठाकुर ने कहा है कि उन्हें जौनपुर के अटाला मस्जिद के निकट स्थित परीक्षा केंद्र के एक अभ्यर्थी ने बताया है कि द्वितीय पाली की परीक्षा प्रश्नपत्र स्वयं उसके मोबाइल नंबर पर दोपहर 12.40 बजे प्राप्त हुआ था।
उस अभ्यर्थी ने दो अन्य लोगों के मोबाइल नंबर बताए हैं, जिनके माध्यम से होते हुए यह प्रश्न पत्र प्राप्त हुआ। अभ्यर्थी ने बताया है कि उसके कमरे में ही आठ से 10 परीक्षार्थियों को पहले से प्रश्नपत्र मिल चुके थे। अमिताभ ठाकुर ने इसे अत्यंत महत्वपूर्ण साक्ष्य बताते हुए तत्काल एफआईआर दर्ज कराए जाने और सीबीआई जांच की मांग की है।
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