इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चुनावी प्रक्रिया में वीडियोग्राफी की प्रामाणिकता, अखंडता, सुरक्षा और सत्यापन के संबंध में रिट याचिका दायर करके अदालत का कीमती समय बर्बाद करने व निजी मामले में कोट और बैंड पहन अदालत में पेश होने पर दिल्ली हाईकोर्ट के अधिवक्ता महमूद प्राचा पर एक लाख का जुर्माना लगाया।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी सराफ और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की अदालत ने दिया है। अधिवक्ता महमूद प्राचा रामपुर लोकसभा चुनाव को लेकर याचिका दाखिल की थी। इस चुनाव में वह खुद निर्दल प्रत्याशी थे। इसके पहले वह समान राहत के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय में भी याचिका दाखिल कर चुके हैं।
कोर्ट ने कहा कि वह यह नहीं समझ पा रहे हैं कि जब उन्होंने एक ही विषय पर पहली दो याचिकाएं दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल कर चुके हैं तो फिर उन्होंने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख क्यों किया। विडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये कोर्ट में पेश हुए अधिवक्ता के आचरण पर भी आपत्ति उठाई। कहा कि कोई अधिवक्ता निजी मामलों में कोट और एडवोकेट बैंड लगा कर अदालत में पेश नहीं हो सकता। लेकिन महमूद प्राचा पेश हुए।
कोर्ट ने उनके इस आचरण पर हैरानी जताई कि वह एक वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। उनसे इस तरह के आचरण की उम्मीद नहीं की जा सकती। यह एक बुनियादी शिष्टाचार है। कोर्ट ने प्राचा को चेतावनी देते हुए एक लाख रुपये का जुर्माना लगाते हुए भविष्य में अदालत की मर्यादा और गरिमा बनाए रखने का आदेश दिया।