नगर निगम के जलकल विभाग में वाटर टैक्स में बिल की राशि में परिवर्तन करके ठगी का खेल सामने आया है। सिविल लाइंस के एक भवन स्वामी ने बिल की जांच की तो मैनुअल और कंप्यूटर से निकले बिल में 362 रुपये का अंतर पाया। काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने 362 रुपये अधिक की रसीद भी दे दी। उन्होंने महाप्रबंधक से इसकी शिकायत की है।
मामला सिविल लाइंस के सरोजनी नायडू मार्ग स्थित एक फ्लैट का है। शिकायतकर्ता का कहना है कि जलकर 6727 रुपये बनता है। 10 फीसदी छूट के बाद 6053 रुपये जमा करना होता है लेकिन जलकल कार्यालय के काउंटर पर बैठे कर्मचारी ने नकद 6415 रुपये लिए। साथ में इतने ही रुपये की कच्ची रसीद दी। उनका यह भी कहना है कि ऑनलाइन टैक्स जमा करने के लिए मशीन रखी थी लेकिन कर्मचारी ने नकद ही लिया। कर्मचारी का कहना था कि अभी मशीन से बिल नहीं निकल रहा।
टैक्स जमा करने के बाद उन्हें कुछ आशंका हुई। इसके बाद उन्होंने नगर निगम से बिल निकलवाया तो पता चला कि जलकर 6727 रुपये बनता है और छूट के बाद 6053 रुपये जमा करने हैं। भवन स्वामी का आरोप है कि कर्मचारी ने पिछले वर्ष भी 6415 रुपये ही जमा कराए थे। उनका कहना है कि कर्मचारी ने इस तरह से कई अन्य लोगों से भी अधिक पैसे लिए हैं। उन्होंने इसकी शिकायत जलकल के महाप्रबंधक कुमार गौरव से की है।