बसपा के पूर्व सांसद कपिल मुनि। फाइल फोटो
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कौशाम्बी के पश्चिम शरीरा थाना क्षेत्र में अवैध खनन के आरोप में पूर्व सांसद कपिल मुनि करवरिया के खिलाफ पुलिस विवेचना एवं चार्जशीट पर कोर्ट के संज्ञान लेने की वैधता की चुनौती याचिका पर राज्य सरकार से जवाब मांगा है। कोर्ट ने कहा है कि हलफनामे में स्पष्ट किया जाए कि माइंस एंड मिनरल एक्ट के अपराध की पुलिस को विवेचना कर चार्जशीट दाखिल करने का कानूनी अधिकार है या नहीं।
कोर्ट ने कहा यदि हलफनामा दाखिल नहीं किया गया तो प्रमुख सचिव खनन उत्तर प्रदेश अगली सुनवाई की तिथि दो मार्च को हाजिर हों। कोर्ट ने कहा तब तक करवरिया को मिली अंतरिम राहत जारी रहेगी। यह आदेश न्यायमूर्ति डीके सिंह ने कपिल मुनि करवरिया की याचिका पर दिया है।
याची का कहना था कि माइंस एंड मिनरल एक्ट के अंतर्गत अपराध की जांच केंद्र या राज्य के प्राधिकृत अधिकारी द्वारा लिखित शिकायत पर की जा सकती है। पुलिस को इस कानून के तहत अपराध की विवेचना करने व चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार नहीं है। जिस पर कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि क्या एसएचओ को इस एक्ट के अपराध की विवेचना कर चार्जशीट दाखिल करने का अधिकार है।