महाकुंभ में गंगा -यमुना पर बनने वाले पांटून पुलों लगने वाले साल स्लीपर और साल एजिंग की टेंडर नियमावली को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। कई सालों से साल स्लीपर और साल एजिंग की आपूर्ति करने वाली फर्म मेसर्स बंगाल वुड एंड अलाइड प्रोडक्ट्स ने टेंडर में नियमों की अनदेखी का आरोप लगाते याचिका दाखिल की है। न्यायमूर्ति सिद्धार्थ वर्मा और न्यायमूर्ति मनीष कुमार निगम की कोर्ट इस मामले की 17 जून को सुनवाई करेगी।
याची फर्म के अधिवक्ता शशि नंदन और उदयन नंदन ने दलील दी कि याची पिछले छह वित्तीय वर्षों में यूपी सरकार को पर्याप्त मात्रा में साल स्लीपर की आपूर्ति की है। इस बार के नए टेंडर नियमों में ढील दिए जाने का उन्होंने विरोध किया। याची के वकील का अदालत के समक्ष कहना था कि इस बार 197 करोड़ रुपये के साल स्लीपर की महाकुंभ मेला में जरूरत है। इतनी बड़ी मात्रा में साल स्लीपर के टेंडर में हिस्सा लेने वाली फर्मों के लिए एक प्रतिशत धरोहर राशि होनी चाहिए, जबकि इसे घटाकर 50 लाख रुपये कर दिया गया है।
इतना ही नहीं नियमानुसार इस टेंडर में भाग लेने वाली फर्म का सालाना टर्न ओवर संपूर्ण टेंडर धनराशि का 30 प्रतिशत यानी 60 करोड़ रुपये सालाना होना चाहिए,लेकिन इसका भी ध्यान नहीं रखा गया है। इसके अलावा साल स्लीपर के इस टेंडर में प्रतिभाग करने वाली कंपनी के अनुभव में भी बदलाव कर दिया गया है। स्लीपर की आपूर्ति के साथ खरीद को भी शामिल कर लिया गया है। जबकि, खरीद के लिए किसी अनुभव की आवश्यकता नहीं होती।