सार
आरोप है कि पुलिस ने अभिलेखों की पड़ताल किए बिना ही विपक्षी से मिलीभगत करके रिपोर्ट लगा दी है। बिशप मोरिस एडगर दान ने बीएचएस के प्रिंसिपल की एमए की डिग्री फर्जी होने का आरोप लगाया था। उसकी शिकायत उन्होंने सिविल लाइंस थाने में की थी। जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर ने प्रिंसिपल से बात नहीं की और रिपोर्ट लगा दी कि मार्कशीट फर्जी है।
ब्वाॅयज हाईस्कूल एंड काॅलेज के प्रिंसिपल डेविड ल्यूक के एमए के अंकपत्र फर्जी मामले में पुलिस ने संबंधित से पूछा भी नहीं और रिपोर्ट लगा दी है। मामले में प्रिंसिपल ने मुख्यमंत्री और पुलिस महानिदेशक से शिकायत की है। बताया कि जिस अंकपत्र को फर्जी बताया जा रहा है, वह उनका नहीं है।
आरोप है कि पुलिस ने अभिलेखों की पड़ताल किए बिना ही विपक्षी से मिलीभगत करके रिपोर्ट लगा दी है। बिशप मोरिस एडगर दान ने बीएचएस के प्रिंसिपल की एमए की डिग्री फर्जी होने का आरोप लगाया था। उसकी शिकायत उन्होंने सिविल लाइंस थाने में की थी। जांच कर रहे सब इंस्पेक्टर ने प्रिंसिपल से बात नहीं की और रिपोर्ट लगा दी कि मार्कशीट फर्जी है।
इस पर प्रिंसिपल ने बताया कि 2007 में अनुक्रमांक 361222 वाले जिस अंकपत्र की जांच पुलिस ने की है, वह उनका नहीं है। उन्होंने कानपुर से एमए नहीं किया। उन्होंने दान पर आरोप वह छवि धूमिल करने के लिए ऐसा करवा रहे हैं।
उन्होंने बताया कि दान ने बीएचएस के खाते से 3.84 करोड़ रुपये अवैध तरीके से निकाला था। उस मामले में उनके खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज हो चुका है। वह जेल भी जा चुके हैं। उसका मामला कोर्ट में विचाराधीन है। उन्होंने वह धनराशि वापस नहीं की है। दान बीएचएस के चेयरमैन नहीं है। वह फर्जी दस्तावेज प्रस्तुत करके विद्यालय पर कब्जा करना चाहते हैं।