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Mahakumbh : इंजीनियर हों या डॉक्टर, साल में एक बार बनना पड़ता है जंगम, महाकुंभ में आया जंगम जोगियों का दल

Thu, 16 Jan 2025 07:31 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

जंगम भगवान शिव व दशनाम जूना अखाड़ा के पुरोहित होते हैं। मान्यता है कि इनकी उत्पत्ति भगवान शिव के विवाह के वक्त हुई थी। दल के सदस्यों का कहना है कि कुरुक्षेत्र की जंगम जोगी बिरादरी में यह प्रथा है कि हर परिवार से किसी एक पुरुष सदस्य को साल में एक बार महाशिवरात्रि पर दो दिन के लिए जंगम बनना ही पड़ता है।

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महाकुंभ में पहुंचे जंगम जोगी। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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हरियाणा के कुरुक्षेत्र की जंगम जोगी बिरादरी में परिवार के हर सदस्य को प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि पर जंगम की वेशभूषा धारण करनी पड़ती है। महाकुंभ में भी जंगम जोगी बिरादरी का एक दल पहुंचा है, जिसके सदस्य सिर पर मुकुट व मोरपंखी धारण कर श्रद्धालुओं व साधुसंतों को शिव कथा सुना रहे हैं।

 

जंगम भगवान शिव व दशनाम जूना अखाड़ा के पुरोहित होते हैं। मान्यता है कि इनकी उत्पत्ति भगवान शिव के विवाह के वक्त हुई थी। दल के सदस्यों का कहना है कि कुरुक्षेत्र की जंगम जोगी बिरादरी में यह प्रथा है कि हर परिवार से किसी एक पुरुष सदस्य को साल में एक बार महाशिवरात्रि पर दो दिन के लिए जंगम बनना ही पड़ता है।

महाकुंभ में आए इस दल में चेतन जंगम भी हैं, जो पेशे से इंजीनियर हैं लेकिन महाशिवरात्रि पर दो दिन के लिए जंगम बनते हैं और दल में शामिल होकर शिव-पार्वती की कथा सुनाते हैं। इस बार महाकुंभ में प्रयागराज आए हैं। इसी तरह जंगम जोगी बिरादरी का कोई सदस्य सेना तो कई पुलिस में है। कुछ डॉक्टर भी हैं। महाकुंभ में आए दल के सभी सदस्यों ने सिर पर मुकुट धारण कर रखा है, जो भगवान ब्रह्मा का प्रतीक है।

इसके साथ ही माता पार्वती का कर्णफूल, चंद्रमा, शेषनाग, नंदीगण की घंटी व सिर पर धारण किया गया मोरपंख भी इन्हें भीड़ में सबसे अलग करता है। बृहस्पतिवार को अखाड़ा सेक्टर में दल के सदस्यों ने जैसे भगवान शिव की कथा शुरू की, आसपास मौजूद भक्त कथा में लीन होकर झूमते नजर आए। सदस्यों ने बताया कि माता पार्वती के जन्म से लेकर भगवान शिव के विवाह तक की कथा चार घंटे में पूरी होती है।

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