हाईकोर्ट ने गौवंशी पशुओं के शवोंं का विधिवत निस्तारण न करने के आरोप में निलंबित ग्राम विकास अधिकारी के निलंबन आदेश पर रोक लगाते हुए सरकार से चार सप्ताह में जवाब तलब किया है। यह आदेश उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेंद्र ने याची ग्राम विकास अधिकारी यशपाल सिंह द्वारा निलंबन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर दिया।
मामला हाथरस जिले के विकास खण्ड मुरसान के अंतर्गत स्थित माधव अस्थाई गौवंश आश्रय स्थल गौजिया का है। गौवंशिय पशुओं के शवों के विधिवत निस्तारण न होने की शिकायत पर मुख्य विकास अधिकारी हाथरस द्वारा गठित जांच टीम की संस्तुति पर ग्राम विकास अधिकारी यशपाल सिंह को निलंबित कर दिया गया था।
याची निलंबित ग्राम विकाय अधिकारी ने निलंबन आदेश को उच्च न्यायालय में चुनौती दी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि दो जनवरी २०१९ के शासनदेश द्वारा गोवंश आश्रय स्थल पर पशुओं के खान - पान की व्यवस्था, गोबर को एकत्र करने, दूध निकालने, हरा चारा काटने और साफ-सफाई की व्यवस्था करने का दायित्च याची को दिया गया है। पशुओं के शवों के विधिवत निस्तारण और उनके स्वास्थय परीक्षण आदि की जिम्मेदारी पशुपालन विभाग को सौंपी गयी है। इसलिए याची का निलंबन आदेश अवैधानिक और मनमाना है।
उच्च न्यायालय की एकल पीठ ने जिला विकास अधिकारी हाथरस द्वारा पारित याची के निलंबन आदेश पर अगली सुनवाई २६ जुलाई तक रोक लगाते हुए सरकार से चार सप्ताह में जवाब मॉगा है।