इलाहाबाद हाईकोर्ट ने वाराणसी नगर निगम के मुख्य कर निर्धारण अधिकारी कुमार असीम रंजन के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी है। उन्हें पद काम करते रहने की इजाजत देते हुए नगर आयुक्त से चार हफ्ते में जबाव तलब किया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति अजीत कुमार की अदालत ने निलंबित मुख्य कर निर्धारण अधिकारी कुमार असीम रंजन की याचिका पर अधिवक्ता तनीषा जहांगीर मुनीर और नगर निगम के अधिवक्ता प्रवीण कुमार गिरि को सुनकर दिया है। याची की अधिवक्ता तनीषा जहांगीर मुनीर ने दलील दी कि याची का निलंबन दुर्भावनापूर्ण है। इससे पहले याची का तबादला किया गया था। इसके खिलाफ याची ने हाईकोर्ट का रुख किया था। इस पर कोर्ट ने अप्रैल में याची के स्थानांतरण पर रोक लगा दी। इससे खफा नगर आयुक्त ने याची को जुलाई में अस्पष्ट और निराधार आरोपों के आधार पर निलंबित कर दिया।
वहीं, नगर निगम के अधिवक्ता प्रवीण कुमार गिरी ने दलील दी कि याची को कर्तव्यहीनता के कारण निलंबित किया गया है। इससे पहले याची को जुलाई व अगस्त 2023 में नोटिस दिया गया था, लेकिन के आचरण में कोई सुधार नहीं हुआ। लिहाजा, उन्हें निलंबित किया गया है। कोर्ट ने नगर निगम की ओर से दी गई दलीलों से असहमति जताई। कहा कि याची से स्पष्टीकरण जुलाई व अगस्त 2023 में मांगा गया। जबकि, निलंबन की कार्रवाई के याची के तबादले पर हाईकोर्ट की रोक के तुरंत बाद 2024 में की गई है। इससे प्रथम दृष्टया याची के अधिवक्ता की ओर से दी गई दलील विचारणीय है।
कोर्ट ने याची के निलंबन आदेश पर रोक लगा दी। हलांकि, कोर्ट ने नगर निगम को याची के खिलाफ शुरू की गई जांच पूरी करने की इजाजत दी है। इस दौरान याची अपने पद पर पहले की तरह मुख्य कर निर्धारण अधिकारी के रूप में काम करता रहेगा और निर्धारित वेतन पाने का हकदार होगा। यह भुगतान तबादले पर रोक लगाने वाली लंबित याचिका पर कोई विपरीत आदेश न आने तक किया जाता रहेगा।