इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दहेज हत्या के दोषसिद्ध पति की जमानत मंजूर करते हुए सजा निलंबित कर दी। यह आदेश न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल की अदालत ने पति संजीव कुमार की ओर से ट्रायल कोर्ट के सजा के आदेश को चुनौती देने वाली अपील पर दिया है। मामला वाराणसी के लंका थाना क्षेत्र का है। संजीव का विवाह 18 अप्रैल 2006 को वाराणसी के चेतगंज थाना क्षेत्र निवासी दयाशंकर की पुत्री उर्मिला के साथ हुआ था। विवाह के तीन वर्ष बाद उर्मिला की संदिग्ध परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी। पिता ने पति संजीव कुमार के साथ उसकी मां, पिता व भाई के खिलाफ दहेज प्रताड़ना-जहर देकर हत्या करने के आरोप में एफआईआर दर्ज की कराई थी।
ट्रायल के बाद वाराणसी की जिला एवं सत्र न्यायाधीश की अदालत ने पति, सास, ससुर और देवर सभी को दोषी ठहराते हुए 10-10 वर्ष के कारावास और 20-20 हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ अपीलार्थी पति ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया। अपीलार्थी के अधिवक्ता आदर्श शुक्ला ने दलील दी कि सभी सह आरोपियों की जमानत मंजूर हो चुकी है। पति को जेल गए एक साल बीत गया है। अपील में जल्द फैसला आने के वक्त लगेगा। कोर्ट ने मामले की विचारणीय मानते हुए पति संजीव को जमानत पर रिहा करने का आदेश दे दिया।