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Amar Ujala Samvad : तीर्थ पुरोहितों बोले- कल्पवासी हमारे भरोसे, हमारी कोई सुनने वाला नहीं

Thu, 27 Nov 2025 01:28 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों की सुविधाओं का पुरसाहाल नहीं है। पुरोहितों ने कहा कल्पवासी हमारे भरोसे मेला क्षेत्र में आते हैं, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है।
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अमर उजाला संवाद में हिस्सा लेने पहुंचे तीर्थ पुरोहित। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि माघ मेला क्षेत्र में कल्पवासियों की सुविधाओं का पुरसाहाल नहीं है। पुरोहितों ने कहा कल्पवासी हमारे भरोसे मेला क्षेत्र में आते हैं, लेकिन हमारी कोई सुनने वाला नहीं है। तीन समय गंगा और संगम स्नान करने वाले कल्पवासियों को लगभग हर बार गंगा और संगम घाट से दूर बसाया जाता है। इस वजह से बुजुर्ग कल्पवासियों को परेशानी होती है। आरोप लगाया कि लगभग हर बार कल्पवासी बाड़े में बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं दी जातीं। समस्या को सुनने वाला कोई नहीं है। तीर्थ पुरोहितों ने अमर उजाला संवाद के माध्यम से कहा है कि मेला प्राधिकरण उन्हें भी बुलाकर वार्ता करे और अखाड़ों से पहले कल्पवासियों को सुविधाएं दे।

- कल्पवासियों को संगम किनारे बसाया जाए।

- कल्पवासी बाड़े में सभी सुविधाएं दी जाएं।

- तीर्थ पुरोहितों को बैठकों में शामिल किया जाए।

- सभी पुरोहितों को परिचय पत्र जारी किए जाएं।

- गंगा का जलस्तर कम करने के प्रयास किए जाएं।

- तीर्थ पुरोहितों की भूमि कम न की जाए।

- पूजन कराने का अधिकार तीर्थ पुरोहितों को ही दिया जाए।

1. राजेंद्र पालीवाल- बैराज न बनने और अखाड़ों को गंगा के पास बसाने से तीर्थ पुरोहितों व कल्पवासियाें को स्नान में दिक्कत होती है। मेला की बसावट में गंगा का जलस्तर बाधा बना है।

2. सौरभ तिवारी- प्रयागवाल की भूमि सीमित है, भीड़ बढ़ रही है लेकिन जमीन बढ़ाने का वादा अधूरा रह जाता है। तीर्थ पुरोहितों को सलाहकार समिति से हटाया जाना अन्यायपूर्ण है।

 

3. गोविंद मिश्र- दक्षिणा व सेवा का अधिकार तीर्थ पुरोहितों का है, जिन्हें अखाड़े छीन रहे हैं। संगम के पास में अखाड़ों को बसाना और संगम से दूर कल्पवासियों को बसाना अनुचित है।

 

4. अंकुश शर्मा- मुख्य समस्या है कि मेला क्षेत्र में तीर्थ पुरोहितों के पहचान पत्र नहीं बनाए जाते, बाकि सभी लोगों के पहचान पत्र बनते हैं।

 

5. प्रियम वैद्य- पूरा मेला वीआईपी कल्चर में बदल गया है जिससे आम कल्पवासी उपेक्षित हैं। बुजुर्ग कल्पवासियों को दूर बसाने पर आने-जाने की उचित व्यवस्था नहीं होती।

 

6. श्रवण शर्मा- कल्पवासियों को मूलभूत सुविधाएं भी नहीं मिलतीं और मेला वीआईपी केंद्रित हो गया है। बैराज निर्माण पर सरकार को निर्णय लेना चाहिए।

 

7. लाल वीरेंद्र कुमार शर्मा- गंगा सफाई पर करोड़ों खर्च हुए पर जल अब तक शुद्ध नहीं हुआ। नागवासुकि क्षेत्र में बांध निर्माण के बारे में पत्र लिखा पर जवाब नहीं मिला।

 

8. धीरज कुमार शर्मा- लगान देने के बाद भी तीर्थ पुरोहित सबसे अधिक उपेक्षित हैं। मेला व्यावसायिक हो गया है और त्रिवेणी पर पुरोहितों की जगह अन्य डेरे बसा दिए गए हैं।

 

9. सागर पांडेय- सदियों से मेले को बसाने वाले तीर्थ पुरोहित आज हाशिये पर हैं। कल्पवासियों की सेवा का अधिकार महंतों ने तीर्थ पुरोहितों से छीन लिया और अब भूमि भी छीनी जा रही है।

 

10. प्रदीप पांडेय- तीर्थ पुरोहितों की कितनी जमीन बची है इसका कोई पारदर्शी हिसाब नहीं है। मेला प्राधिकरण तीर्थ पुरोहितों के डिजिटल कार्ड व पास की व्यवस्था भी नहीं कर रहा है।

 

11. पं कमल शर्मा- तीर्थ पुरोहितों की भूमि लगातार कम की जा रही है। अखाड़ों को संगम से दूर बसाया जाए ताकि पुरोहितों का हक सुरक्षित रहे।

 

12. आशुतोष पालीवाल- गंगा पूजन का अधिकार तीर्थ पुरोहितों का होता है जो उनसे छीन लिया गया है। हमारी मांग है कि जिनकी जमीन पानी में चली गई है उनका ही विस्थापन कराया जाए।

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