ज्यादातर लोग वैक्सीन की दूसरी डोज भी ले चुके हैं। ऐसे में बहुत खतरा नहीं है। लक्षण नजर आएं तो छिपाएं नहीं, तुरंत चिकित्सक के परामर्श से दवा लें। इसी तरह डॉ. भारत भूषण का कहना था कि कोरोना संक्रमण से उबरने से लिए होम्योपैथ में रामबाण दवाएं हैं। जब इस वैरिएंट से मरीज आने लगेंगे तब इसके लक्षणों के आधार पर सटीक दवा और डोज निर्धारित की जा सकेगी।
इसी तरह डॉ. पूनम माथुर ने बताया कि दूसरी लहर में जब श्मशानों पर शवों को जलाने के लिए जगह नहीं मिल रही थी, अस्पताल भरे पड़े थे, तब उनकेपास आक्सीजन उपकरणों के सहारे 15 कोविड संक्रमित आए थे। खास बात यह रही कि उन सभी मरीजों की जान बच गई और अब वे पूरी तरह स्वस्थ हैं। इसी तरह डॉ. रश्मि सिंह ने भी दूसरी लहर की भयावहता के बीच कोरोना मरीजों के उपाचर से जुड़े अपने अनुभव बताए।
उनका कहना था कि उस कठिन दौर में होम्योपैथ से इलाज कराने वालों की मौत नहीं हुई। डॉ. आंचल बजाज का कहना था कि कोरोना के लक्षण पाए जाने पर चिकित्सक के परामर्श से ही उचित खुराक लेनी चाहिए। होम्योपैथ की दवाएं रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाती हैं और शरीर को सक्षम बनाती हैं। इनके अलावा प्रो. अमिताभ सिन्हा, प्रो. राहुल केशरवानी ने भी कोरोना से बचाव के उपायों को साझा किया।
होम्योपैथिक दवाओं में कोरोना से लड़ने का बल: डॉ. केके श्रीवास्तव
लाल बहादुर शास्त्री होम्योपैथिक मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. केके श्रीवास्तव ने कोरोना संक्रमण से बचाव के उपायों पर अहम जानकारियां साझी कीं। उनका कहना था कि हर व्यक्ति में बीमारी से लड़ने की क्षमता होती है। दवा देने के बाद संक्रमण तभी दूर नहीं होता , जब इम्युनिटी कमजोर रहती है। ऐसे में होम्योपैथ की दवाओं से रोग से लड़ने के लिए प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है। आर्सेनिक जैसी संजीवनी बूटी सिर्फ होम्योपैथ के पास है, जो कोरोना में सबसे कारगर साबित हुई। लेकिन, ऐसी दवाओं को बिना चिकित्सक के परामर्श के नहीं लेना चाहिए।