कटान-दलदल और पानी से चौतरफा मुसीबतों में घिरे कल्पवासी
प्रयागराज । गंगा में लगातार जलस्तर बढ़ने से और कटान बढ़ने की वजह से माघ मेले में बसे हजारों कर कल्पवासी बिलबिला गए हैं। कड़ाके की ठंड में उन्हें शिविरों से बाहर सुरक्षित जगह के लिए भटकना पड़ रहा है। इस बीच प्रवह रोकने के लिए मेला प्रशासन ने अस्थाई तटबंध बनाने शुरू कर दिए हैं।
संगम की रेती पर 580 हेक्टेयर क्षेत्रफल में बसे माघ मेले पर असमय गंगा के जल प्रवाह में वृद्धि का खतरा बढ़ गया है। वह भी ऐसे समय जब अभी मेले के तीन स्नान पर्व बाकी है।मौनी अमावस्या का स्नान अगले माह की एक फरवरी को होगा । इससे पहले गंगा में लगातार बढ़ते जलस्तर और तेजी से हो रही कटान ने शुक्रवार को हजारों कल्पवासियों को अपनी चपेट में ले लिया। जिस तरह से जलस्तर बढ़ता जा रहा है उससे आशंका व्यक्त की जा रही है कि अगर योगी आदित्यनाथ सरकार ने शीर्ष स्तर पर पहल करके जल प्रवाह को पश्चिमी नगरों में डायवर्ट करने या रोकने का उपाय नहीं किया तो समय से पहले ही जप,तप,ध्यान का मेला उजड़ने के लिए मजबूर हो जाएगा। फिलहाल नए प्रभारी मेला अधिकारी अरविंद कुमार चौहान मंडलायुक्त संजय गोयल के साथ मेला क्षेत्र मैं कल्पवासियों पर आई आफत कम करने के उपायों पर मंथन कर रहे हैं। इस बीच कटान से प्रभावित इलाकों में मूलभूत सुविधाओं से जुड़े विभागों को अलर्ट कर दिया गया है, ताकि अगर जलस्तर और बढ़ता है तो समय रहते इंतजामों को समेटा जा सके।