शनि प्रदोष के दुर्लभ संयोग में मकर संक्रांति पर उमड़ा आस्था का प्रवाह
क्रासर
पुण्यकाल में त्रिवेणी की लहरों पर भक्ति का गोता, सर्द हवाओं में लगी आस्था की डुबकी
कहीं दीप जले तो कहीं आस्थावानों ने कामनाओं का दिया अर्घ्य, अन्न-वस्त्र के दान की मची होड़
अमर उजाला ब्यूरो
प्रयागराज। शनि प्रदोष के दुर्लभ संयोग में भगवान सूर्य उत्तरायण हो गए। इसी के साथ संगम
पर शनि प्रदोष के संयोग में मकर संक्रांति का स्नान आरंभ हुआ। एक तरफ सर्द हवा के झोंके और
दूसरी ओर श्रद्धालुओं के डग आस्था के पथ पर बढ़तेे रहे। कोविड प्रोटोकॉल की परवाह किए
बिना संगम पर स्नान के साथ ही कामनाओं का अर्घ्य देने की होड़ रही। रेती पर हवन,भजन के
बीच अन्न-वस्त्र का दान कर संत-भक्त धन्य हुए।
संगम पर मकर संक्रांति का स्नान शनिवार की मध्यरात्रि से ही आरंभ हो गया। शुक्रवार की
रात8:49 बजे सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश किया। भगवान सूर्य के उत्तरायण होने के बाद
मध्यरात्रि से गंगा, यमुना, विलुप्त सरस्वती की धारा में पुण्य की डुबकी लगने लगी।भोर में
संगम का तट संतों-भक्तों की भीड़ से खचाखच पट गया। माघ मेले के प्रथम स्नान पर्व को देखते
हुए वाहनों का प्रवेश दो दिन पहले ही प्रतिबंधित कर दिया गया था। इस वजह से सिविल
लाइंस, दारागंज के अलावा कीडगंज से संगम जाने वाले मार्गों पर लोग लंबी दूरी तय कर संगम
पहुंचते रहे। कोई नंगे पांव बढ़ा तो कोई लेटते हुए। कोई परिवार के सदस्यों को सहजेता रहा
तो कोई अपनी गठरी सुरक्षित करने की फिक्र लिए बढ़ा। अपर संगम के अलावा लोवर संगम
मार्ग पर कड़ाके की सर्दी के बावजूद श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। मेले के हर सेक्टर में
कोरोना संक्रमण के प्रति सजगता के संदेश दिए जाते रहे। बावजूद इसके किसी को भी संक्रमण
की चिंता नहीं रही। हर कोई सिर्फ संगम में डुबकी लगाने और पुण्य कमाने की चाह लिए आगे
बढ़ता रहा।