नियुक्ति के लिए दो माह से निदेशालय में भटक रहे अभ्यर्थी
० असिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र के २७३ पदों पर चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र मिलने का इंतजार
० एनआईसी के सॉफ्टवेयर संशोधन का इंतजार, शिक्षाशास्त्र के चयनितों की नियुक्ति में भी फंस सकता है पेच
प्रयागराज। चार साल पुरानी भर्ती की दो माह पहले काउंसलिंग पूरी हुई तो असिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र के २७३ पदों चयनति अभ्यर्थियों ने राहत की सांस ली। उन्हें लगा कि अब नौकरी पक्की हो गई है, लेकिन एनआईसी के सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी उनकी नियुक्ति की राह में रोड़ा बनकर खड़ी हो गई। अभ्यर्थी अब दो माह से उचच शिक्षा निदेशालय के चक्कर लगा रहे हैं और निदेशालय में हर हर बार कोई न कोई आश्वासन देकर उन्हें टाला जा रहा है। यह हालत तब है, जब पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि कोई भी भर्ती प्रक्रिया छह माह में पूरी कर अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिए जाएं।
विज्ञापन संख्या ४७ के तहत प्रदेश के अशासकीय महाविद्यालयों में असिस्टेंट्र प्रोफेसर समाजशास्त्र के २७३ पदों पर भर्ती होनी है। इन पदों पर चयनित अभ्यर्थियों की नियुक्ति फंसी हुई है और इस बीच उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या ४७ के तहत ही असिस्टेंट प्रोफेसर शिक्षाशास्त्र के १०० पदों का अंतिम चयन परिणाम भी घोषित कर दिया है। लेकिन, अब तक समाजशास्त्र के चयनित अभ्यर्थियों को ही नियुक्ति नहीं मिली है। ऐसे में जब उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग शिक्षाशास्त्र के चयनितों की काउंसलिंग के लिए संबंधित फाइलें उच्च शिक्षा निदेशालय को भेजेगा, तब निदेशालय में शिक्षाशस्त्र के अभ्यर्थियों की नियुक्ति भी फंसेगी।
उच्च शिक्षा निदेशालय की ओर से दो माह पूर्व असिस्टेंट प्रोफेसर समाजशास्त्र के २७३ पदों पर चयनित अभ्यर्थियेां की काउंसलिंग कराई गई थी। अभ्यर्थियों को ३० अगस्त को नियुक्ति पत्र जारी किया जाना था, लेकिन काउंसलिंग पूरी होते ही एनआईसी के सॉफ्टवेयर में तकनीकी गड़बड़ी आ गई। दरअसल, यह गड़बड़ी रिजल्ट का प्रारूप बदलने के कारण हुई। आयोग ने चयनितों का जो रिजल्ट निदेशालय को भेजा था, वह एनआईसी के सॉफ्टवेयर से मेल नहीं खा रहा था। पूर्व उच्च शिक्षा निदेशक डॉ. वंदना शर्मा ने शासन और एनआईसी को पत्र भेजकर इस पूरे मामले से अवगत कराया था। साथ ही एनआईसी से सॉफ्टवेयर में संशोधन के लिए कहा था, लेकिन डॉ. वंदना के सेवानिवृत्त होने के बाद प्रक्रिया फिर धीमी पड़ गई और अभ्यर्थियों को अब रोज निदेशालय के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। इस मसले पर चयनित अभ्यर्थी कई बार निदेशाालय में धरना-प्रदर्शन भी कर चुके हैं। उन्हें हर बार आश्वासन मिला, लेकिन कोई ठोस कदम न उठाए जाने के कारण नियुक्ति फंसी हुई है।