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Allahabad University : पत्थरों में समाया विज्ञान, पढ़ाई को बनाएगा आसान, इविवि में जल्द बनेगा साइंस पार्क

Fri, 04 Oct 2024 05:03 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

साइंस पार्क में चारों ओर पत्थरों की पटरी बनाई जा रही है और पत्थरों को तराश कर विश्वविद्यालय में किए गए विश्वस्तरीय अविष्कारों, महत्वपूर्ण उपकरणों और खगोलीय घटनाओं को उनपर उकेरा जा रहा है। यह पार्क भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. केएन उत्तम के नेतृत्व में तैयार किया जा रहा है।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय (इविवि) के भौतिक विज्ञान विभाग में एक ऐसा साइंस पार्क तैयार किया जा रहा है, जहां पत्थरों के माध्यम से विज्ञान के गूढ़ रहस्यों को समझाने का प्रयास किया जाएगा। स्कूली छात्र-छात्राओं के बीच विज्ञान को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से यह पार्क काफी महत्वपूर्ण साबित होगा।

साइंस पार्क में चारों ओर पत्थरों की पटरी बनाई जा रही है और पत्थरों को तराश कर विश्वविद्यालय में किए गए विश्वस्तरीय अविष्कारों, महत्वपूर्ण उपकरणों और खगोलीय घटनाओं को उनपर उकेरा जा रहा है। यह पार्क भौतिक विज्ञान के विभागाध्यक्ष प्रो. केएन उत्तम के नेतृत्व में तैयार किया जा रहा है। प्रो. उत्तम बताते हैं कि पत्थरों पर उन सभी अविष्कारों को तराशकर उकेरा गया है, जो विश्वविद्यालय में हुए और पूरी दुनिया में उनका महत्व है।

इन्हीं में एक है वैज्ञानिक प्रो. मेघनाद साहा द्वारा 1927 में तैयार की गई उच्चताप भट्टी, जो आज भी विभाग की प्रयोगशाला में मौजूद है। इसके जरिये दुनिया में पहली बार सूर्य का स्पेक्ट्रम लिया गया और उससे सूर्य में उपस्थित तत्वों का पता लगाया गया। इस खोज का नतीजा है कि इस दिशा में लगातार शोध होते रहे और इसका आधुनिकतम रूप आदित्य एल-1 है, जिसे सूर्य में उपस्थित तत्वों और गतिविधियों के बारे में पता लगाने के लिए भेजा गया है।

विश्वविद्यालय के नव प्रवेशी विद्यार्थियाें और स्कूली छात्र-छात्राओं को भी जानना चाहिए कि विज्ञान की दुनिया में इविवि की कितनी और क्या भागीदारी रही है। प्रो. साहा ने दुनिया को बताया था कि शोध और अध्यापन के साथ ही विज्ञान से समाज की समस्याओं को कैसे दूर किया जा सकता है। साथ ही विज्ञान को लोकप्रिय बनाने की दिशा में भी उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा।

इसी उद्देश्य के साथ साइंस पार्क की स्थापना की जा रही है, ताकि पार्क में घूमते हुए विद्यार्थी विज्ञान की दुनिया को समझ सकें और उनके लिए विज्ञान की पढ़ाई आसान हो सके। विश्वविद्यालय के भौतिक विज्ञान विभाग में पिछले 100 वर्षों में जो भी विश्वस्तरीय शोध हुए, साइंस पार्क में लगे पत्थर उनकी सफलता की कहानी बयां करेंगे।

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