सिंचाई विभाग नलकूप खंड में अधिकारियों व अवर अभियंताओं की आपसी खींचतान का खामियाजा मंडल के लाखों किसानों को भुगतना पड़ रहा है। सात सूत्रीय मांगों को लेकर मंडल के 90 अवर अभियंता कामकाज छोड़ पिछले पांच दिन से धरने पर है जिसका असर सिंचाई व्यवस्था पर भी दिखायी देने लगा है। मानसून की सक्रियता कम होने से जहां बारिश कम हो रही है और किसानों को धान की रोपाई के लिए नहरों व सरकारी ट्यूबवेलों के पानी पर आश्रित होना पड़ रहा है, वहीं अवर अभियंता के कार्य बहिष्कार ने किसानों की परेशानी और बढ़ा है। अभियंताओं के धरने में शामिल होने से कई टयूबवेलों का संचालन नहीं हो पा रहा है। जबकि खराब पड़े ट्यूबवेल की मरम्मत में बाधा आ रही है। यह स्थिति तब है जबकि सूखे की आशंकाओं के मद्देनजर शासन ने सभी ट्यूबवेलों की मरम्मत कर उन्हें चालू हालत में रखने का निर्देश दिया है ताकि किसानों को खेतों की सिंचाई में किसी भी प्रकार की बाधा न आए। दूसरी ओर अधीक्षण अभियंता प्रदीप झा का कहना है कि अवर अभियंताओं की कई मांगों का कोई औचित्य ही नहीं है। अलबत्ता कुछ मांगें जायज हैं जिन पर विचार किया जा रहा है।