उर्दू अनुवादक ने ट्रांसफर के खिलाफ दाखिल की है याचिका
यह भी बताया गया कि पुलिस की प्रारंभिक जांच में पता लगा था की उर्दू अनुवादक माफिया अतीक तक विभाग की गोपनीय सूचनाएं पहुंचाता है। इस दलील पर सख्त हुई अदालत ने पुलिस आयुक्त से व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल कर यह बताने को कहा था कि गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप में सिर्फ स्थानांतरण क्यों किया गया? क्या विभाग में मुनव्वर का कोई मददगार है या फिर यह आरोप मात्र स्थानांतरण आदेश का बचाव करने के लिए लगाया जा रहा है?
इसके जवाब में पुलिस आयुक्त ने हलफनामा दाखिल किया है। बताया है कि मुनव्वर खान को प्रारंभिक जांच में माफिया अतीक अहमद को गोपनीय सूचनाएं देने और अतरसुइया थाने में तैनाती के दौरान मंसूर अली पार्क में नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में बैठे आंदोलनकारियों की मदद करने में लिप्त पाया गया था।
पुलिस आयुक्त के हलफनामे का जवाब देने के लिए उर्दू अनुवादक के अधिवक्ता ने दो हफ्ते का समय मांगा था। इसे अदालत ने मंजूर भी कर लिया। आगे इसकी सुनवाई के लिए शुक्रवार की तारीख नियत हुई थी, लेकिन हो नहीं पाई।