इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंडलायुक्त प्रयागराज व एसडीएम सदर को उमरपुर नीवां गांव के रिहायशी प्लॉट संख्या 410 रकबा 290 वर्गमीटर पर विपक्षी द्वारा जबरन बनाई गई पक्की सड़क व लोहे के गेट को 48 घंटे में हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा है, जमीन कब्जाने की जांच कराकर कानूनी कार्रवाई करें। अतीक के करीबी विपक्षी भूमाफिया हसन एखलाक उर्फ रिजवान अहमद व परिवार पर याची की जमीन हथियाने व जान से मारने की धमकी देने का आरोप है। यह आदेश न्यायमूर्ति एसपी केशरवानी तथा न्यायमूर्ति अनीस कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने मोहम्मद जकी की याचिका को स्वीकार करते हुए दिया है।
याची के अधिवक्ता शशिभूषण मिश्र व आशीष कुमार मिश्र का कहना था कि याची ने रिहायशी प्लॉट खरीदा है। जिस पर विपक्षी हसन ने जबरन कब्जा कर लिया और सड़क बनाकर गांव सभा की जमीन बेच रहा है। याची ने पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से शिकायत की किंतु कोई कार्रवाई नहीं की गई। दोबारा शिकायत की तो एसडीएम से जांच रिपोर्ट मांगी गई, जिसमें दो स्वतंत्र गवाहों ने आरोपों की पुष्टि की। रिपोर्ट में कहा गया कि विवाद सिविल प्रकृति का है। सिविल वाद दायर करें।
याची ने फिर आयुक्त से शिकायत की। जिस पर राजस्व अधिकारियों, लेखपाल व धूमनगंज थाना इंचार्ज इंस्पेक्टर व उमरपुर नीवां चौकी इंचार्ज से जांच कराई गई। अपर सिटी मजिस्ट्रेट ने लोगों के बयान लेकर रिपोर्ट दी। कहा कि याची विवादित प्लॉट का स्वामी है। विपक्षी का कहना था याची की सहमति से सीमेंटेड सड़क बनाई है। जबकि कोर्ट ने कहा, ऐसा कोई दस्तावेज नहीं है। विपक्षी ने जबरन कब्जा किया है, जिसे हटाया जाए।