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यूपी : ज्वाइनिंग के बाद 60 से अधिक प्राचार्यों ने छोड़ दी नौकरी, फिर से कार्यवाहक प्राचार्यों के भराेसे हुए मह

Mon, 31 Jul 2023 03:09 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या-49 के तहत प्राचार्य के 290 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने इनमें से 284 अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के माध्यम से नियुक्ति पत्र जारी कर दिया था और सभी ने ज्वाइन भी कर लिया, लेकिन साल भर में ही 60 से अधिक प्राचार्यों ने विभिन्न कारणों से इस्तीफा दे दिया।
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उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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प्रदेश के अशासकीय सहायता प्राप्त महाविद्यालयों में 60 से अधिक प्राचार्यों ने ज्वाइन करने के बाद नौकरी छोड़ दी। किसी ने प्रबंधन से विवाद के कारण इस्तीफा दे दिया तो किसी ने घर से काफी दूर तैनाती मिलने के कारण नौकरी छोड़ दी। ऐसे कॉलेज अब फिर से कार्यवाहक प्राचार्यों के भरोसे चल रहे हैं।

उत्तर प्रदेश उच्चतर शिक्षा सेवा आयोग ने विज्ञापन संख्या-49 के तहत प्राचार्य के 290 पदों पर भर्ती के लिए परीक्षा कराई थी। परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने इनमें से 284 अभ्यर्थियों को काउंसलिंग के माध्यम से नियुक्ति पत्र जारी कर दिया था और सभी ने ज्वाइन भी कर लिया, लेकिन साल भर में ही 60 से अधिक प्राचार्यों ने विभिन्न कारणों से इस्तीफा दे दिया।

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कॉलेज आवंटन की प्रक्रिया में बदलाव के कारण बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को पूर्व तैनाती वाले स्थल से काफी दूर ज्वाइनिंग मिली। अभ्यर्थियों ने कुछ दिनों तक तो नौकरी की, लेकिन असुविधा के कारण बाद में नौकरी छोड़कर अपने पुराने कॉलेज में लौट गए। वहीं, कई अभ्यर्थियों को प्रमोशन मिलने के कारण प्रोफेसर का पद मिल गया। ऐसे अभ्यर्थियों ने अपने पुराने कॉलेज को प्राथमिकता देते हुए प्राचार्य के पद से इस्तीफा दे दिया।
 

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इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसे प्राचार्यों ने इस्तीफा दिया है, जिनका प्रबंधन से विवाद हो गया था। उच्च शिक्षा निदेशालय के सूत्रों का कहना है कि स्थायी प्राचार्यों की नियुक्ति से पहले ज्यादातर कॉलेजों में कार्यवाहक प्राचार्य तैनात थे, जिन पर प्रबंधन आसानी से दबाव बना लेता था। नई नियुक्ति होने के बाद कई मामले सामने आए, जिनमें प्रबंधन और प्राचार्यों के बीच किसी मुद्दे पर तनाव हो गया और इसकी शिकायत निदेशालय तक पहुंची।

वहीं, कई मामलों में कॉलेज आवंटन के बाद प्राचार्य जब ज्वाइन करने पहुंचे तो प्रबंधन ने उन्हें ज्वाइन नहीं कराया। ऐसे मामलों में सीधे निदेशालय को हस्तक्षेप करना पड़ा। मेरठ के एक काॅलेज में प्रबंधन और प्राचार्य के बीच तनातनी इतनी बढ़ गई कि प्रबंधन ने प्राचार्य को निलंबित कर दिया और बाद में निलंबन से बहाल होने पर प्राचार्य ने कॉलेज से इस्तीफा देकर अपने पुराने कॉलेज में ही ज्वाइन कर दिया।

इन तमाम कारणों से अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्यों के 60 से अधिक पद खाली हो चुके हैं। प्राचार्य के पद रिक्त होने के बाद अब नए सिरे से भर्ती होगी, लेकिन इसमें अभी वक्त लगेगाा। नए शिक्षा सेवा चयन आयोग का अब तक गठन नहीं हुआ है और अशासकीय महाविद्यालयों में प्राचार्य के पद पर भर्ती अब नए आयोग के माध्यम से ही होगी।

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