वार्ड में नवजात शिशु के सौदे की जानकारी जब चिकित्सकों को मिली तब वह महिला को समझाने में जुट गए। तीन बच्चों की इस मां का कहना था कि उसका दूसरा पुत्र विकलांग है। वह चौका-बर्तन कर किसी तरह परिवार का गुजारा करती है। उसके पति कारपेंटर हैं। लेकिन, मजदूरी से इतनी रकम नहीं मिल पाती, जिससे वह विकलांग बच्चे का उफचार करा सकें।
ऐसे में बच्चे के उपचार के लिए वह इस शिशु को बेचना चाहती है। इस पर चिकित्सकों और कर्मियों ने उसे विकलांग बच्चे की दवा और नवजात शिशु के पालन के लिए दो हजार रुपये प्रतिमाह देने का वादा किया। कागज पर लिखित तौर पर चिकित्सकों ने इस आशय का सहमति पत्र महिला को दिया, तब जाकर उसने बेटे को बेचने इरादा छोड़ा।