इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मदरसा अरबिया शमशुल उलूम सिकरीगंज एहटा नवाब गोरखपुर के लिए प्रबंधक की ओर से निकाले गए शिक्षक और क्लर्क भर्ती के विज्ञापन को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने पाया कि यह विज्ञापन सरकारी नीति और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के पूर्ण उल्लंघन में जारी किया गया था। यह आदेश न्यायमूर्ति मंजू रानी चौहान की एकलपीठ ने मदरसा अरबिया शमशुल उलूम, सिकरीगंज, एहटा नवाब की प्रबंध कमेटी व अन्य की याचिका पर दिया है। प्रतिवादी संख्या चार (प्रबंधक) ने 29 अप्रैल 2025 को पांच सहायक अध्यापक ताहतानिया और एक क्लर्क के पद के चयन संबंधी विज्ञापन एक समाचार पत्र में प्रकाशित कराया था। 28 मई 2025 को साक्षात्कार पत्र जारी कर साक्षात्कार की तिथि 14 जून 2025 निर्धारित कर दी। इस विज्ञापन को रद्द करने की मांग करते हुए प्रबंध कमेटी व अन्य ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की।
याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि सरकार ने एक आदेश जारी किया था कि मदरसों में शिक्षकों की योग्यता का विषयवार/कक्षावार पुन:निर्धारण होने के बाद ही नई नियुक्तियां की जाएं। इस संबंध में अल्पसंख्यक कल्याण, उप्र के निदेशक ने और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी ने संस्थानों के प्रबंधकों को इन निर्देशों का अनुपालन करने और नई नियुक्तियां न करने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी प्रतिवादी संख्या-4 (प्रबंधक) ने भर्ती के लिए विज्ञापन प्रकाशित कराया। साथ ही याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि प्रतिवादी संख्या-4 ने धोखाधड़ी से प्रबंधक का पद हासिल किया है। कोर्ट ने पक्षों को सुनने के बाद पाया कि प्रतिवादी संख्या-4 की ओर से विज्ञापन जारी करना सरकारी नीति का उल्लंघन है। कोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए जारी विज्ञापन रद्द कर दिया।