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अभिजीत घोषाल साक्षात्कार : पढ़ाई छोड़कर गाना न गाएं युवा, संगीत जीविकोपार्जन का आसान माध्यम नहीं

Mon, 20 Feb 2023 08:52 AM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

संगीत में शार्टकट के लिए कोई जगह नहीं है। बिना रियाज, अथक परिश्रम के आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इसलिए युवाओं को कभी पढ़ाई छोड़कर नहीं गाना चाहिए। संगीत जीविकोपार्जन का आसान माध्यम कभी नहीं रहा है।
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Prayagraj : पार्श्व गायक अभिजीत घोषाल। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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संगीत में शार्टकट के लिए कोई जगह नहीं है। बिना रियाज, अथक परिश्रम के आगे नहीं बढ़ा जा सकता। इसलिए युवाओं को कभी पढ़ाई छोड़कर नहीं गाना चाहिए। संगीत जीविकोपार्जन का आसान माध्यम कभी नहीं रहा है। ऐसे में पहले पढ़ाई फिर संगीत में भविष्य बनाने की चिंता करें। रविवार को पार्श्व गायक अभिजीत निर्मल घोषाल ने अमर उजाला से बातचीत के दौरान संगीत के सफर और संघर्ष से जुड़े अपने इन अनुभवों को साझा किया।

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कुछ गीत -कुछ बातचीत शीर्षक से आयोजित संगीत शृंखला में हिस्सा लेने के लिए आए अभिजीत ने जार्जटाउन में खास मुलाकात में बॉलीवुड से लेकर रैप म्यूजिक और हिपहॉप तक को लेकर विस्तार से चर्चा की। पद्मश्री पं. अजय चक्रवर्ती से प्रभावित होकर संगीत के क्षेत्र में मुकाम हासिल करने वाले अभिजीत परिश्रम को सबसे बड़ा हथियार और पूंजी मानते हैं। वह कहते हैं कि आजकल रियलिटी शो किसी भी युवा को भीड़ से निकालकर अलग पायदान पर खड़ा करने का माध्यम बन सकते हैं, लेकिन किसी को मंजिल पानी है तो खुद का रियाज ही साथ देगा।

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संगीत में शार्टकट नहीं अपनाना चाहिए। उन्होंने खुद का उदाहरण दिया। बताया कि वह अभी भी तीन गुरुओं शेखर सेन, पं. श्रीकांत बाडकर और तूलिका घोष से सीखकर शास्त्रीय रागों का रियाज रहे हैं। आज के दौर के युवा गिटार हाथ में लेकर कुछ लोगों की टीम के साथ बैंड बनाकर घूमने लग जा रहे हैं।इस दौर में यही हो रहा है। गिटार लेकर कुछ लोगों के साथ इंस्टाग्राम, फेसबुक पर कुछ लाइक बटोर लेना और संगीत की बारीकियां सीखना दोनों अलग बातें हैं।
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बॉलीवुड के इस समय के संगीत को वह कंफ्यूज कर देने वाला बताते हैं। उनका कहना है कि इरशाद कामिल, अमित भट्टाचार्य समेत कई गीतकार अच्छा लिख रहे हैं, लेकिन संगीत में भी एक खास किस्म की बमबाजी का दौर चल रहा है। पहले एक वर्ष में 20-25 फिल्में रिलीज होती थीं।

एक फिल्म में चार से पांच गाने होते थे। लेकिन, अब हर शुक्रवार को 25 से अधिक फिल्में रिलीज हो रही हैं। एक फिल्म में छह गाने भी आए तो हर हफ्ते तीन सौ गाने आ रहे हैं। इस वजह से भी लोग ऐसे गीतों को सुनने से ऊब रहे हैं। भविष्य की योजना के बारे में पूछने पर वह कहते हैं कि ऐसा संगीत रचने की ख्वाहिश है कि मरने के बाद आने वाली पीढ़ी उनके गीतों से सीख लेकर कुछ काम कर सके।
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