लेड़ियारी। खीरी में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिन राम महाराज ने कहा कि क्षणिक क्रोध हजारों वर्षों की तपस्या नष्ट कर देता है। महराज ने कहा कि भगवान का दर्शन बहुत ही कठिन होता है। पांच वर्ष की उम्र में राजा ध्रुव भगवान प्राप्त करने के लिए जंगल की ओर चल पडे। लगभग तीन माह तक दूसरे तीसरे दिन जल लेकर ओम नमः भगवते वासुदेवाय का जप करते रहे, लेकिन भगवान उन्हें नहीं मिल पाए। फिर भी अपनी पूरी कोशिश के साथ महीने भर जल भी छोड़ कर मात्र वायु लेकर भगवान को भजते रहे। इसके बाद भी भगवान नहीं मिले। तब उन्होंने एक पैर के अंगूठे को पृथ्वी पर स्पर्श कर एक स्वांस नली पर हो गये तब जाकर आकाश लोक में देवताओं का स्वांस में रुकावट हुई। अंत में भगवान ने प्रकट होकर ध्रुव को दर्शन दिए। कथा के मुख्य यजमान राजेश केसरवानी व धर्मराज केशवानी ने आभार प्रकट किया गया।