इलाहाबाद। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर एलपीजी (डीबीटीएल) योजना से जुड़ने के लिए तेल कंपनियों ने गैस एजेंसियों को मोर्चे पर खड़ा कर दिया लेकिन बैंकों में ग्राहक परेशान हैं। शिकायत है कि एलपीजी ग्राहकों के गैस कनेक्शन से जुड़े कागज बैंक कर्मचारी जमा नहीं कर रहे हैं। बैंकों से ग्राहकों को यह कहकर लौटाया जा रहा है कि वित्त मंत्रालय से उनके पास ऐसा कोई आदेश नहीं आया है। उधर, तेल कंपनियों ने एजेंसियों को 40 बैंकों की सूची जारी की है जहां सब्सिडी योजना का लाभ मिलेगा। इसमें सरकारी के साथ निजी क्षेत्र के बैंक भी शामिल है। डीबीटीएल योजना एक जनवरी से लागू हो रही है। सब्सिडी का लाभ लेने के लिए ग्राह को बैंक में गैस कनेक्शन से जुड़े कागज देने हैं। आधार नंबर प्राप्त कर चुके गैस उपभोक्ताओं को एजेंसी से मिलने वाले फार्म-एक को पूरी तरह भरकर बैंकों में जमा करना है। जिनके पास आधार नंबर नहीं है, उन ग्राहकों को एजेंसी से फार्म-तीन मिलेंगे। इस फार्म को पूरी तरह भरकर ब्लू बुक, सिलेंडर पाने की आखिरी रसीद और 17 डिजिट की गैस कनेक्शन आईडी बैंक में जमा करनी है। एजेंसियों पर डीबीटीएल योजना की जानकारी लेने और संबंधित फार्म जमा करने की भीड़ लगी है। कई एजेंसियों ने ग्राहकों की सुविधा के लिए अलग काउंटर खोलने या कैंप लगाने के इंतजाम शुरू कर दिया है, लेकिन बैंकों में इसका उल्टा हो रहा है। आईओसी ने बैंकों के असहयोग को देखते हुए कई एजेंसियों से फार्म-तीन का वितरण रोक दिया है। कंपनी के अफसरों का दावा है कि बैंकों के राज्य स्तरीय अफसरों से इसके लिए बातचीत की जा रही है। ऑल इंडिया एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटर्स फेडरेशन के सचिव केपी मिश्रा का आरोप है कि बैंक सहयोग नहीं कर रहे हैं। बड़ी संख्या में ग्राहक इसकी शिकायत तेल कंपनी में कर रहे हैं। उधर, भाजपा महानगर अध्यक्ष शशि वार्ष्णेय का कहना है कि आम जनता की समस्या को देखते हुए बैंकों के मैनेजरों से मुलाकात इसकी शिकायत की जाएगी। समस्या न सुलझी तो डीएम और कमिश्नर से भी इसकी शिकायत होगी।