इलाहाबाद। मनुष्य सामाजिक प्राणी होने के साथ ही सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक प्राणी भी है। इतिहास को समझने के दो तरीके हैं। पहला अवशेषों के माध्यम से हम ताजमहल और लाल किला आदि का अध्ययन करते हैं जबकि स्मृतियों के आधार पर हम पांडुलिपियों का अध्ययन करते हैं। उक्त बातें इतिहासकार प्रो. लाल बहादुर वर्मा ने कही। प्रो. वर्मा स्वराज विद्यापीठ में इतिहास बोध के लघु पाठ्यक्रम में बतौर अतिथि संबोधित कर रहे थे। प्रो. वर्मा ने कहा कि इतिहास अतीत मात्र नही है। बल्कि वह मनुष्य की मनीषा को समझने की प्रक्रिया है। इतिहास हमें छॉछ की बजाए गर्म दूध को फूंक फूंककर पीना सिखाता है। प्रो. वर्मा ने पाठ्यक्रम में शामिल बच्चों को बड़ी ही सरल में इतिहास के महत्व को समझाया। कार्यक्रम के शुरुआत में प्रो. आरसी त्रिपाठी ने विद्यार्थियों को स्वराज विद्यापीठ के व्यापार मुक्त शिक्षा के उद्देश्यों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।