इलाहाबाद हाईकोर्ट में समाज कल्याण विभाग का गजब कारनामा पहुंचा है। विभाग ने 80 वर्षीय कल्लू की उम्र 60 साल से कम बताकर उनकी वृद्धा पेंशन रोक दी है। प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री कार्यालय के आदेश पर जांच के बाद पेंशन बहाल की गई, लेकिन खाते में फूटी कौड़ी नहीं पहुंची। अब कोर्ट ने समाज कल्याण विभाग से 29 मई तक जवाब तलब किया है। पूछा है कि आदेश के बावजूद बुजुर्ग की पेंशन क्यों नहीं दी जा रही है।
यह आदेश न्यायमूर्ति शेखर बी.सराफ और न्यायमूर्ति डॉ. योगेंद्र कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने हाईकोर्ट पहुंचे बुजुर्ग कल्लू की याचिका पर दिया है। मामला प्रयागराज के धनूपुर ब्लॉक का है। समाज कल्याण विभाग ने शाहपुर गांव निवासी 80 वर्षीय कल्लू की कागजों में कम उम्र दिखाकर उनकी वृद्धा पेंशन बंद कर दी थी। फर्जी रिपोर्ट के चलते मई 2022 से बंद पड़ी पेंशन के लिए कल्लू अफसरों की चौखटों पर चक्कर लगाते रहे, लेकिन किसी ने सुनवाई नहीं की।
प्रधानमंत्री से शिकायत पर मुख्यमंत्री सचिवालय के संयुक्त सचिव भास्कर पांडेय के आदेश पर समाज कल्याण निदेशालय ने जिला समाज कल्याण अधिकारी से जांच रिपोर्ट तलब की। तब सच्चाई सामने आई कि अभिलेखों में कल्लू की उम्र गलत दर्ज की गई थी। इसके बाद कल्लू की वृद्धा पेंशन बहाल हो पाई, लेकिन राशि अभी तक उनके खाते में नहीं पहुंची। इसके खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।