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69000 शिक्षक भर्ती मामले : 2234 अभ्यर्थियों का एक अंक बढ़ाकर दो महीने में तैयार करें मेरिट लिस्ट

Tue, 28 Nov 2023 09:36 PM IST
विनोद सिंह अमर उजाला नेटवर्क, प्रयागराज

सार

कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादियों की ओर से समयसीमा के अंदर यह काम पूरा नहीं किया जाता है तो याचीगण न्यायालय के समक्ष आने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने उपेंद्र कुमार दयाल सहित अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 69000 शिक्षक भर्ती मामले में 2234 अभ्यार्थियों का एक अंक बढ़ाकर दो महीने में नई मेरिट लिस्ट तैयार करने का आदेश दिया है। कोर्ट ने कहा है कि प्रतिवादियों की ओर से समयसीमा के अंदर यह काम पूरा नहीं किया जाता है तो याचीगण न्यायालय के समक्ष आने के लिए स्वतंत्र होंगे। यह आदेश न्यायमूर्ति रोहित रंजन अग्रवाल ने उपेंद्र कुमार दयाल सहित अन्य की याचिका को निस्तारित करते हुए दिया है।

सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश बेसिक शिक्षा विभाग के सचिव प्रताप सिंह बघेल और परीक्षा नियामक प्राधिकारी अनिल भूषण चतुर्वेदी कोर्ट के समक्ष उपस्थित हुए। दोनों अधिकारियों की ओर से हलफनामा दाखिल किया गया। कोर्ट ने इसे रिकॉर्ड पर लेते हुए कहा कि परीक्षा नियामक प्राधिकारी सचिव की ओर से याचियों/अभ्यर्थियों का एक अंक बढ़ाने के लिए 15 दिन का समय देने की मांग की गई, ताकि वे संबंधित याचियों/अभ्यर्थियों को एक अंक आवंटित कर सूची बेसिक शिक्षा विभाग को भेज सकें।

उधर, बेसिक शिक्षा सचिव प्रताप सिंह बघेल ने कोर्ट से कहा कि एक अंक बढ़ाने के बाद जो सूची उनके पास परीक्षा नियामक प्राधिकारी की ओर से आएगी उससे मेरिट लिस्ट तैयार करने के लिए उन्हें दो महीने का समय दिए जाए। कोर्ट ने दोनों अधिकारियों के बयान को देखते हुए उन्हें एक अंक बढ़ाकर मेरिट लिस्ट तैयार करने की प्रक्रिया को दो महीने में पूरा करने का आदेश दिया। कहा कि अगर, समयसीमा में यह प्रक्रिया पूरी नहीं की गई तो याचियों के पास यह स्वतंत्रता होगी कि वे फिर से न्यायालय का दरवाजा खटखटाएं।

हाईकोर्ट की खंडपीठ ने याचिका पर सुनवाई करते हुए भर्ती परीक्षा के एक प्रश्न के उत्तर को गलत मानते हुए याचियों/अभ्यर्थियों के दावे को सही माना और एक अंक बढ़ाने का आदेश दिया था। परीक्षा नियामक प्राधिकारी और बेसिक शिक्षा विभाग की ओर से खंडपीठ के आदेश का अनुपालन नहीं किया गया। इस पर अभ्यर्थियों ने अवमानना याचिका दाखिल की थी, जिस पर सुनवाई करते हुए अवमानना पीठ ने यह आदेश पारित किया है।

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