सार
राहगीरों ने बताया कि स्टैनली रोड पर नया पुरवा मोड़ तिराहे से लेकर पतंजलि चौराहे तक सड़क के बीचोंबीच लगे कई खंभे गायब हो चुके हैं। डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त पड़ा है और इसके चलते आए दिन राहगीर दुर्घटना का शिकार होते हैं। उधर, कुछ ऐसा ही हाल एमएनएनआईटी चौराहे से बैंक रोड चौराहे तक जाने वाले रास्ते का है।
कभी सुना है कि रोड से खंभे ही गायब हो गए हों। नहीं न, लेकिन शहर में ऐसा हुआ है। चौंकाने वाली बात यह कि किसी आम रास्ते पर नहीं बल्कि प्रयागराज-लखनऊ हाईवे पर स्थित स्टैनली रोड व बैंक रोड जैसे वीआईपी रास्तों पर ऐसा हुआ है। इसके चलते शहीद द्वार से लेकर रसूलाबाद मोड़ व पतंजलि चौराहे तक शाम होते ही अंधेरा छा जाता है।
राहगीरों ने बताया कि स्टैनली रोड पर नया पुरवा मोड़ तिराहे से लेकर पतंजलि चौराहे तक सड़क के बीचोंबीच लगे कई खंभे गायब हो चुके हैं। डिवाइडर भी क्षतिग्रस्त पड़ा है और इसके चलते आए दिन राहगीर दुर्घटना का शिकार होते हैं। उधर, कुछ ऐसा ही हाल एमएनएनआईटी चौराहे से बैंक रोड चौराहे तक जाने वाले रास्ते का है।
यहां भी महज 500 मीटर की दूरी में कई खंभे गायब हो चुके हैं। हाल यह है कि खंभों का एल्यूमिनियम बेस तो है लेकिन वहां खंभे नहीं हैं। यह खंभे कहां गए, इस बारे में खोज खबर लेने वाला कोई नहीं। सवाल यह भी है कि खंभे अगर क्षतिग्रस्त हो गए तो उन्हें अब तक बदला क्यों नहीं गया। मंगलवार रात आठ बजे के करीब जायजा लिया गया तो बैंक रोड पर भी तेलियरगंज आलू गोदाम से लेकर मस्जिद के सामने तक अंधेरा छाया रहा।
श्रद्धालुओं से भरी बस पलटी थी, 20 हुए थे जख्मी
स्टैनली रोड पर लाइटिंग की व्यवस्था न होने के चलते ही पिछले साल माघ मेले में माघी पूर्णिमा का स्नान कर लौट रहे गोंडा के स्नानार्थियों से भरी बस वीर अब्दुल हमीद द्वार पर पलट गई थी। इसमें 20 लोग जख्मी हो गए थे और कंडक्टर का एक पैर पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। अंधेरा होने के कारण ड्राइवर डिवाइडर नहीं देख पाया और बस डिवाइडर पर चढ़कर पलट गई थी। तब भी स्थानीय लोगों ने संबंधित विभागों को जमकर कोसा था। शर्मनाक यह है कि नौ महीने बाद भी स्थिति जस की तस है।