सरकार की तरफ से प्रोजेक्ट अलंकार के जरिये सूबे के संस्कृत स्कूलों का कायाकल्प करने की तैयारी शुरू हो गई है। सरकार की तरफ से शुरू की गई योजना में 50 साल पुराने स्कूलों का कायाकल्प किया जाना है। वहीं, स्कूलों के कायाकल्प में होने वाले खर्च का पांच प्रतिशत स्कूल प्रबंधन को देना होगा। शेष राशि सरकार की तरफ से खर्च की जाएगी। सरकार की तरफ से इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया है। पूर्व नियम के अनुसार 50 प्रतिशत राशि स्कूल प्रबंधन द्वारा खर्च किए जाने की व्यवस्था थी।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से नियमों में बदलाव के बाद संस्कृत स्कूलों के प्रबंधन ने भी खुशी जाहिर की है। इसका असर है कि अब तक 22 करोड़ का प्रस्ताव निदेशालय को प्राप्त हो चुका है। बस्ती, मुजफ्फरनगर, सोनभद्र, अम्बेडकरनगर, गोंडा, गोरखपुर, बलरामपुर और महाराजगंज से मिले 22 करोड़ के प्रस्ताव को निदेशालय की तरफ से जल्द ही मंजूरी के लिए शासन को भेजा जाएगा।
सूबे में कक्षा छह से 12 तक के 958 संस्कृत विद्यालयों में उन विद्यालयों को प्राथमिकता दी जाएगी, जहां पर 100 से अधिक विद्यार्थी पढ़ रहे हैं। शासन की तरफ से आवंटित बजट में 50 प्रतिशत खर्च स्कूलों के सौंदर्यीकरण पर होगा। सौदामिनी संस्कृत महाविद्यालय के प्रबंधक प्रो. एमसी चटोपाध्याय ने बताया कि पूर्व में 50 प्रतिशत मैचिंग ग्रांट नियम होने के कारण प्रस्ताव नहीं भेजा गया था। प्रबंधन के पास इतना बजट नहीं था।
नियमों में बदलाव के बाद विद्यालय की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार कराया गया है। गौरतलब है कि पूर्व में सरकार की तरफ से प्रोजेक्ट अलंकार के अंतर्गत संस्कृत स्कूलों के कायाकल्प के लिए बनाए गए नियम के चलते स्कूल प्रबंधन की तरफ से रुची न दिखाए जाने के कारण पिछले वर्ष 28 करोड़ रुपये की स्वीकृत धनराशि लैप्स हो गई थी। इसके बाद माध्यमिक शिक्षा विभाग की तरफ से नियमों में बदलाव किया गया है।