अलीगढ़। अलीगढ़ जनपद की सीमा से होकर गुजरने वाली यमुना नदी घड़ियालों को रास आने लगी है। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के वाइल्ड लाइफ साइंस डिपार्टमेंट के मुताबिक यमुना नदी चंबल के बाद अब घड़ियालों के प्रजनन के लिए बेहद अनुकूल होती जा रही है। डिपार्टमेंट के प्रोफेसर अफीफुल्ला कहते हैं कि यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता में हुआ सुधार इनके लिए मुफ़ीद है। लॉकडाउन के चलते यमुना नदी के पानी में प्रदूषण का स्तर कम हुआ है। इसे इकोलॉजिकल फ्लो कहते हैं। साथ ही घड़ियाल के लिए नदी का बहुत तेज बहाव नहीं चाहिए और न ही बहुत ठहरा हुआ पानी चाहिए। यह विशेषताएं यमुना नदी के पानी में हैं। इसीलिए घड़ियालों के प्राकृतिक आवास के लिए यमुना नदी अब बेहद अनुकूल साबित हो रही है। प्रोफेसर अफीफुल्ला कहते हैं कि नदी में घड़ियालों की संख्या बढ़ने से नदी के अवशिष्ट पदार्थों में भी कमी आएगी और उससे पानी की गुणवत्ता में और सुधार होगा। पानी के अनुकूल होने का ही यह असर है कि करीब 7 वर्ष पहले दो घड़ियाल जवा की नहर तक चले आए थे, बाद में इनको रेस्क्यू करके गंगा नदी में छुड़वाया गया था।