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Aligarh News: गैस रिसाव की हायतौबा में महिला की मौत, पति ने खड़ा किया हंगामा

Fri, 30 Sep 2022 01:57 AM IST
अलीगढ़ ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अलीगढ़

सार

महिला की मौत के बाद उसके पति ने इमरजेंसी में देरी से प्रवेश मिलने और फिर इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। इस पर पुलिस ने उसे समझाकर शांत किया।
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तालसपुर अलदुआ मीट फैक्टरी में अमोनिया के रिसाव से बेहोश हुई कर्मचारी अस्पताल में भर्ती - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मीट फैक्टरी में अमोनिया रिसाव के बाद जेएन मेडिकल कॉलेज लाए गए 59 मरीजों के उपचार के दौरान एक अन्य बीमार महिला की मौत हो गई। इस पर महिला के पति ने इमरजेंसी में देरी से प्रवेश मिलने और फिर इलाज न मिलने का आरोप लगाते हुए हंगामा कर दिया। इस पर पुलिस ने उसे समझाकर शांत किया। बाद में वह शव को साथ ले गया।
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जिस वक्त अमोनिया रिसाव के मरीजों को उपचार के लिए भरती कराया गया। उस दौरान एक साथ जेएन मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में अफरा - तफरी का माहौल बन गया। जिसके चलते मेडिकल कालेज के सुरक्षाकर्मी सतर्क हो गए और बेवजह किसी को भी इमरजेंसी में आने जाने से रोक दिया।

इधर, पुलिस प्रशासन द्वारा मेडिकल इमरजेंसी में अलर्ट जारी कर दिया गया। इसी के चलते डॉक्टरों की टीम भी इन मरीजों के उपचार में जुटी रही । जैसे - जैसे मरीजों को देखा जा रहा था। उसके बाद उन्हें ऑक्सीजन वार्ड में शिफ्ट किया जा रहा था। इसी बीच 9 बजे करीब जोहराबाग की 40 वर्षीय शबाना तैयब की घर में काम करते समय अचानक तबियत बिगड़ गई।
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इस पर पति मो.तैयब उन्हें मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी लेकर पहुंचे। मगर काफी मुश्किल से प्रयास के बाद शबाना को सुरक्षाकर्मियों ने इमरजेंसी में प्रवेश करने दिया। बाद में इलाज भी बमुश्किल से दिया गया। इसी बीच महिला की मौत हो गई। इस पर पति व साथ आए परिजन भड़क गए और हंगामा करते हुए डॉक्टरों पर आरोप लगा दिया।

बाद में किसी तरह पुलिसकर्मियों ने समझाकर शांत करते हुए उसे यहां से वापस भेजा। बाद में वह शव को साथ ले गया। इधर, गैस रिसाव से पीड़ित मरीजों को तीन घंटे के बाद होश आने लगा। इसके बाद उन्हें खाना मुहैया कराया गया। बाद में एक-एक कर घर भेजा गया। शाम होते होते ही अधिकांश मरीज घर भेज दिए गए थे।

बिना सूचना पहुंचे मरीज, मेडिकल में मची अफरा-तफरी
मरीजों के आने पर मेडिकल कॉलेज में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यहां बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासनिक अलर्ट के मरीज पहुंचे, जिन्हें निजी वाहनों से उतारकर इमरजेंसी में जमीन पर लिटा दिया गया। जिसे देख इमरजेंसी स्टाफ भी घबरा गया। पूछा गया कि क्या माजरा है। तब सच्चाई सामने बताई।

एक साथ इतने बेहोश मरीज आने और किसी तरह की पुलिस प्रशासनिक सूचना या अलर्ट न होने पर इमरजेंसी प्रबंधन के कान खड़े हुए। तत्काल इमरजेंसी से यह सूचना सिविल लाइंस पुलिस के जरिये अधिकारियों तक पहुंचाई गई। तब सूचना पर अधिकारी वहां पहुंचे। इसके बाद डॉक्टरों को आनन-फानन इलाज में लगाया गया।

बता दें कि जब भी इस तरह का कोई घटनाक्रम होता है तो प्रशासन द्वारा मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी को पहले से अलर्ट मैसेज किया जाता है। जिस पर मेडिकल स्टाफ तैयारी कर लेता है और मरीजों के आते ही उन्हें रिसीव कर उपचार शुरू कर दिया जाता है। मगर इस बार कुछ भी ऐसा नहीं था।

जांच को पहुंची टीमों ने उजागर की लापरवाही
अलदुआ मीट फैक्टरी में अमोनिया रिसाव की सूचना पर घटनास्थल का जायजा लेने के बाद अधिकारियों के निर्देश पर पहुंची फायर व फॉरेंसिक टीम ने घंटों तक जांच की। इस जांच में वैल्डिंग युक्त पाइप लाइन से गैस लीक होना उजागर हुआ, तब अधिकारियों ने पाया कि यह तो बड़ी लापरवाही है।

सीएफओ विवेक विवेक शर्मा ने पाया कि जिस जगह गैस लीक हुई है, वह जगह पाइप में कट आने पर वैल्डिंग कराई गई है, जबकि यह पाइप बदला जाना चाहिए था। जब यह रिपोर्ट डीएम एसएसपी को दी गई तो मुकदमा दर्ज कराया जाना तय हुआ।

इसके बाद रोरावर थाने में मुकदमा दर्ज कराया गया। साथ में पाइप लाइन का वह टुकड़ा भी सीज किया गया है, जहां से गैस लीक थी और वह पाइप वैल्ड हो रहा था। जिसे जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जा रहा है। उसकी जांच रिपोर्ट आने पर उसे मुकदमे का हिस्सा बनाया जाएगा। सीएफओ ने बताया कि रिपोर्ट अधिकारियों को सौंप दी गई है। सभी तथ्यों को उसमें शामिल किया गया है। मुख्य कारण वैल्ड जगह से गैस रिसाव सामने आया है।
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फैक्टरी में श्रमिकों का नहीं मिला कोई रिकार्ड
इस दुर्घटना के बाद एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि फैक्टरी के पास मजदूरों का कोई लेखा जोखा और संख्या नहीं है। खुद डीएम ने जब मौके पर यह जानकारी मांगनी चाही तो सभी चुप्पी साध गए। बाद में डीएम ने इस विषय पर भी बारीकी से जांच के निर्देश दिए गए और इस काम में खुद प्रशासन व श्रम विभाग की टीम को लगाया गया है।

बिना दस्तावेजों के रोहिंग्या भी लगे इस फैक्टरी में काम पर
इस दौरान जांच में यह भी उजागर हुआ कि आसपास की बस्तियों में रहने वाले रोहिंग्या मजदूर भी काफी संख्या में इस फैक्टरी में बिना किसी वैध दस्तावेज के लगे हुए हैं। बेहोश हुई महिलाओं में भी कुछ ऐसी महिलाएं शामिल हैं जो रोहिंग्या हैं। उन्हें किस आधार पर स्थानीय दस्तावेज के आधार पर काम पर लगाया गया है, इस बात की जांच अब पुलिस स्तर से की जा रही है।

बता दें कि अपने शहर के रोरावर इलाके में काफी संख्या में रोहिंग्या रहते हैं जो मीट फैक्टरी में काम करते हैं। समय समय पर अवैध तरीके से रहने वाले रोहिंग्या पकड़े भी गए हैं। इस दुर्घटना के बाद फैक्टरी प्रबंधन की एक यह कारगुजारी भी सामने आई है कि बिना वैध दस्तावेजों के इन मजदूरों को काम पर रखा गया है।
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