बिना सूचना पहुंचे मरीज, मेडिकल में मची अफरा-तफरी
मरीजों के आने पर मेडिकल कॉलेज में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। यहां बिना किसी पूर्व सूचना या प्रशासनिक अलर्ट के मरीज पहुंचे, जिन्हें निजी वाहनों से उतारकर इमरजेंसी में जमीन पर लिटा दिया गया। जिसे देख इमरजेंसी स्टाफ भी घबरा गया। पूछा गया कि क्या माजरा है। तब सच्चाई सामने बताई।
एक साथ इतने बेहोश मरीज आने और किसी तरह की पुलिस प्रशासनिक सूचना या अलर्ट न होने पर इमरजेंसी प्रबंधन के कान खड़े हुए। तत्काल इमरजेंसी से यह सूचना सिविल लाइंस पुलिस के जरिये अधिकारियों तक पहुंचाई गई। तब सूचना पर अधिकारी वहां पहुंचे। इसके बाद डॉक्टरों को आनन-फानन इलाज में लगाया गया।
बता दें कि जब भी इस तरह का कोई घटनाक्रम होता है तो प्रशासन द्वारा मेडिकल कॉलेज इमरजेंसी को पहले से अलर्ट मैसेज किया जाता है। जिस पर मेडिकल स्टाफ तैयारी कर लेता है और मरीजों के आते ही उन्हें रिसीव कर उपचार शुरू कर दिया जाता है। मगर इस बार कुछ भी ऐसा नहीं था।
फैक्टरी में श्रमिकों का नहीं मिला कोई रिकार्ड
इस दुर्घटना के बाद एक चौकाने वाला तथ्य सामने आया कि फैक्टरी के पास मजदूरों का कोई लेखा जोखा और संख्या नहीं है। खुद डीएम ने जब मौके पर यह जानकारी मांगनी चाही तो सभी चुप्पी साध गए। बाद में डीएम ने इस विषय पर भी बारीकी से जांच के निर्देश दिए गए और इस काम में खुद प्रशासन व श्रम विभाग की टीम को लगाया गया है।
बिना दस्तावेजों के रोहिंग्या भी लगे इस फैक्टरी में काम पर
इस दौरान जांच में यह भी उजागर हुआ कि आसपास की बस्तियों में रहने वाले रोहिंग्या मजदूर भी काफी संख्या में इस फैक्टरी में बिना किसी वैध दस्तावेज के लगे हुए हैं। बेहोश हुई महिलाओं में भी कुछ ऐसी महिलाएं शामिल हैं जो रोहिंग्या हैं। उन्हें किस आधार पर स्थानीय दस्तावेज के आधार पर काम पर लगाया गया है, इस बात की जांच अब पुलिस स्तर से की जा रही है।
बता दें कि अपने शहर के रोरावर इलाके में काफी संख्या में रोहिंग्या रहते हैं जो मीट फैक्टरी में काम करते हैं। समय समय पर अवैध तरीके से रहने वाले रोहिंग्या पकड़े भी गए हैं। इस दुर्घटना के बाद फैक्टरी प्रबंधन की एक यह कारगुजारी भी सामने आई है कि बिना वैध दस्तावेजों के इन मजदूरों को काम पर रखा गया है।