देश में गंदे पानी को पीने योग्य बनाने की कवायद चल रही है। बांस के जरिये पानी को स्वच्छ बनाने पर शोध चल रहा है। इस प्रक्रिया में बिजली पैदा करके रुपये कमाए जाएंगे। 12 देशों की शोध टीम की अगुवाई अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय रहा है।
देश में 14 पायलट प्रोजेक्ट चल रहे हैं। इसी साल में इसके परिणाम आएंगे। गंदे पानी को पीने योग्य बनाने के लिए स्लज ट्रीटमेंट पर शोध हो रहा है। इसके लिए अमुवि में 6, नेशनल इनवायरमेंट इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट नागपुर में तीन, आईआईटी धनबाद, सिम्बोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी पुणे में दो-दो व आईआईटी खड़गपुर में एक पायलट प्रोजेक्ट चल रहा है। लगभग 75 फीसदी काम पूरा हो चुका है।
अब इसके सौ फीसदी परिणाम आने बाकी हैं। 75 फीसदी परिणाम संतोषजनक है। पवित्र योजना भारत सरकार और यूरोप की मदद से संचालित हो रहा है। इनमें डेनमार्क, आस्टि्रया, जर्मनी, इटली, स्विटजरलैंड, स्पेन आदि देश शामिल हैं।
गंदे पानी को स्वच्छ बनाने पर शोध हो रहा है। बांस की जड़ों का उपयोग कर पानी को शुद्ध किया जा रहा है। इससे पानी स्वच्छ होगा। पानी से बिजली भी पैदा की जा सकेगी। इससे आमदनी भी होगी। स्लज ट्रीटमेंट पर काम किया जा रहा है। इसे ऐसी जगह फेंका जाएगा, जहां इसका नकारात्मक प्रभाव न पड़ सके। -प्रो. नदीम खलील, कोआर्डिनेटर, इंडिया लीड, पवित्र योजना।